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उन्हें समय पर संभाले, जो अवसाद में हैं

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विशेष  

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बारां

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Mukesh Gaur

Sep 10, 2023

उन्हें समय पर संभाले, जो अवसाद में हैं

उन्हें समय पर संभाले, जो अवसाद में हैं

बारां. यूं तो विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितम्बर को है, लेकिन इस दिन रविवार होने के कारण इस दिवस को लेकर 11 सितंबर को जिले में विभिन्न जागरुकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। चिकित्सा विभाग की ओर से विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के रूप में मनाया जाएगा। आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जिले एवं राज्य स्तर पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों की जाएंगी साथ ही जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों पर आत्महत्या नहीं करने के लिए प्रेरित करने के लिए शपथ दिलवाई जाएगी। इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम यू होप थोट एक्शन रखा गया है। जिसका तात्पर्य आशा जगाना है। दुनिया के बाकी देशों की तरह ही भारत में भी महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा आत्महत्या करते हैं। 2011 में हर दिन 21 छात्रों ने खुदकुशी की तो 2022-23 में यह संख्या 40 के पार हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल दुनिया में लगभग आठ लाख से अधिक लोग खुदकुशी करते हैं। भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानसून की असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना किसानों की आत्महत्याओं का मुख्य कारण माना जाता रहा है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियां, समस्याओं के एक चक्र की शुरुआत करती हैं।

शैक्षणिक दबाव भी प्रमुख कारण
माता-पिता, शिक्षकों और समाज से उच्च उम्मीदें परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए अत्यधिक तनाव और दबाव का कारण बन जाती हैं। सफल होने का यह दबाव कुछ छात्रों के लिए भारी हो सकता है, इससे असफलता और निराशा की भावनाएं पैदा होती हैं। मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे अवसाद, ङ्क्षचता और अन्य विकार जैसी समस्याएं छात्रों की आत्महत्या को बढ़ावा देती है। तनाव, अकेलेपन और समर्थन की कमी इसको गंभीर बनाती हैं।

अलगाव व अकेलापन
कोटा जैसे शहरों में दूर-दूर से छात्र पढऩे आते हैं। परिवार और दोस्तों से दूर रहने पर अलगाव और अकेलापन हावी हो जाता है। इससे निपटना कठिन हो सकता है। ट््यूशन फीस या जीवन यापन का खर्च वहन न कर पाना, छात्रों के लिए बहुत अधिक तनाव और ङ्क्षचता पैदा करता है। गत वर्षो में भारत में जिन लोगों ने आत्महत्या की उसमें से 25.6 प्रतिशत दिहाड़ी म•ादूर थे। इनमें महिलाएं अधिक थीं। आत्महत्या करने वाले लोगों में एक बड़ा वर्ग उन लोगों का था, जिनका खुद का रोजगार था।


आत्म विश्वास बढ़ाएं, पहचानें और सहारा दें
वर्तमान युग में अति महत्वाकांक्षा, असफलता तथा आर्थिक कुचक्र एवं पारिवारिक व सामाजिक कुंठाए समेत कई कारण व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने लगते हैं। जिससे ऐसे रस रसायन भी शरीर में बनने लगते है। जब कोई गुमशुम रहने लगे, अकेला रहने लगे, नशा करने लगे, उदास रहने लगे तो ऐसे व्यक्ति को समय पर संभालना चाहिए तथा ऐसे व्यक्ति के आत्म विश्वास को बढ़ाने के लिए सतत सम्पर्क में रहकर उत्साहित करना चाहिए। अधिक परेशानी नजर आए तो मानसिक चिकित्सक से उपचार करवाना चाहिए।
डॉ. अनुराग खींची, न्यूरोसाइकेट्रिस्ट