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रामगढ़ में 147 बाद निकला सूरज…ना यहां गब्बर पहुंचा ना बसंती क्या है मामला जानिए….

हम फिल्मी नहीं असली रामगढ़ की बात कर रहे हैं। यह ऐसा रामगढ़ है जहां आज तक ना तो गब्बर पहुंचा और ना ही बसंती

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फिल्म शौले का नाम और रामगढ़ का नाम तो आपने सुना होगा। हम फिल्मी नहीं असली रामगढ़ की बात कर रहे हैं। यह ऐसा रामगढ़ है जहां आज तक ना तो गब्बर पहुंचा और ना ही बसंती। वीरू और जय की तो बात ही दूर है।147 साल पहले यह स्थान नजर आया था। करोड़ों साल पहले उल्कापिंडों के पृथ्वी से टकराने और उसके बाद आए बदलावों का चश्मदीद गवाह बना रामगढ़ गांव पिछले 147 सालों से अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था। पहले वर्ष 1869 में हुए भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण में इस जगह की खोज की गई। जबकि वर्ष 1882-83 में पहली बार इसका आकार मापने और फोटो लेने में सफलता मिली। वर्ष 1969 में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों के शोध को प्लेटरी एंड स्पेश साइंस सेंटर कनाड़ा ने मान्यता दी और रामगढ़ के चार किमी चौड़े गड्ढे को अर्थ इंपेक्ट डाटाबेस में शामिल किया। भारतीय संास्कृतिक निधी (इंटैक) ने सालों तक हुए शोध व जांच रिपोर्ट को इकट्ठा कर जीएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक ए. तिरुवेंगदम ने सौंपा। उन्होंने उपलब्ध प्रमाणों को पर्याप्त बताते हुए रामगढ़ क्रेटर को देश का पहला भूविरासत स्थल घोषित करने पर सैद्वांतिक सहमति जताई। उसके बाद इस छोटे से गांव को विश्व के मानचित्र पर जाना पहचाना जाने लगा हैं।

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मांगरोल. वैश्विक मानचित्र पर हाड़ौती की नई पहचान के रूप में अपना नाम दर्ज कराने वाले बारां जिले के ऐतिहासिक स्थल रामगढ़़ के अवलोकन के लिए रविवार शाम आस्ट्रेलिया, डेनमार्क व जर्मनी के करीब आधा दर्जन पर्यटक मांगरोल पहुंचे।
इनका रामगढ़ रोड तिराहे पर साहित्यकार जगदीश निराला समेत अन्य लोगों ने परंपरागत तरीके से रोली चंदन का तिलक लगाकर स्वागत किया। अलवर इंटैक चैप्टर की ओर से आयोजित विरासत यात्रा के साथ यहां पहुंचे डेनमार्क के ज्ञानधर्म, आस्ट्रेलिया के जैकपुट, डेनिसमिल जर्मनी की बारबरामुंज, आस्ट्रेलिया की मोनानंद व मैरी एक लक्जरी बस में सवार होकर यहां पहुंचे व स्वागत के बाद रामगढ़ के लिए रवाना हो गए। उनके साथ इंटैक चैप्टर अलवर के कन्वीनर बोधिसत्व, महासचिव निर्वाण वन फाउंडेशन अनुसुईया राय, कॉर्डिनेटर चाइल्ड लाइन अलवर सतीश चौधरी के अलावा पचास से ज्यादा लोग भी थे। कन्वीनर बोधिसत्व ने बताया कि रात में ऐतिहासिक भंडदेवरा मंदिर के अवलोकन के बाद विदेशी मेहमान रामगढ़ की दुर्गम पहाडिय़ों के बीच कैम्प फायर कर रात यही रूकेंगे। वे सोमवार सुबह रामगढ़ में क्रेटर बनने व वहां के बदले हालातों का अवलोकन करेंगे।