8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बारां जिले के इस पवित्र स्थान पर है संस्कारों की पाठशाला

गायत्री शक्तिपीठ की शुरुआत 1998 में 108 कुंडीय महायज्ञ के साथ हुई थी
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बारां

•

image

Mukesh Gaur

•

Updated: 25 Sep 2021, 11:08 PM IST

बारां जिले के इस पवित्र स्थान पर है संस्कारों की पाठशाला

बारां जिले के इस पवित्र स्थान पर है संस्कारों की पाठशाला

केलवाड़ा. सीताबाड़ी स्थित गायत्री शक्ति पीठ की शुरुआत 1998 में 108 कुंडीय महायज्ञ के साथ हुई थी।जून 2012 में 51 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ सीताबाड़ी पावन धाम में गायत्री शक्ति पीठ की स्थापना हुई, जो सामाजिक कार्यों में अपनी भागीदारी देकर समाज को संबल व दिशा देने का कार्य कर रहा है ।

स्थानीय शक्तिपीठ द्वारा किए गए कार्य
शक्तिपीठ द्वारा 2012-13 में महावृक्षारोपण अभियान चलाकर 580 पौधे ट्री गार्ड सहित लगाए गए। इनमें से 325 पौधे वृक्ष का रूप ले चुके हैं। गायत्री शक्तिपीठ द्वारा 2015 से ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया। इसमें अब तक 1500 यूनिट रक्तदान हो चुका है। उपखंड का सर्वाधिक 487 यूनिट रक्तदान गायत्री शक्तिपीठ द्वारा केलवाड़ा में रिकॉर्ड किया गया।

गायत्री शक्ति पीठ सीताबाड़ी के परिव्राजक हरीश जी देवांगन ने बताया कि किसी भी कार्यकर्ता के जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ अन्य सभी कार्यक्रमों में कार्यकर्ता के घर जाकर दीपयज्ञ किया जाता है। इसके माध्यम से कार्यकर्ताओं को दीर्घायु की मंगल कामना की जाती है। केलवाड़ा शक्तिपीठ के प्रमुख कार्यकर्ताओं के रूप में रामचरण मेहता, रघुवीर मेहता, लक्ष्मी चंद मेहता, शिवचरण मेहता,सत्यप्रकाश सोनी, रामप्रताप मीणा, गिरिराज राठौर शामिल हैं। कोरोना काल में कार्यकर्ताओं द्वारा तुलसी, गिलोय, एलोवेरा के पौधों का वितरण घर-घर किया गया। श्योपुर (म.प्र) में बाढ़ से हुई भीषण तबाही पर कार्यकर्ताओं ने राशन पैकेट पहुंचाए।