20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जब पशु चिकित्सालय पर ताला दिखा तो आपे से बाहर हो गए ग्रामीण

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन

2 min read
Google source verification

बारां

image

Mukesh Gaur

Jan 15, 2022

जब पशु चिकित्सालय पर ताला दिखा तो आपे से बाहर हो गए ग्रामीण

जब पशु चिकित्सालय पर ताला दिखा तो आपे से बाहर हो गए ग्रामीण

बामला. कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय के हाल बेहाल हैं। यहां पांच से सात सालों से पशु चिकित्सक के अभाव में आसपास के क्षेत्रों से अपने मवेशियों के इलाज कराने आ रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के अभाव में कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सालय बरसों से एक ही कंपाउंडर के भरोसे चल रहा है। इसके कारण पशुपालकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीते पांच से सात वर्षों में वैसे तो करीब चार पशु चिकित्सकों की नियुक्ति हुई, लेकिन कोई पांच दिन टिका तो कोई एक माह, कोई छह महीने। इसके कारण समय-समय पर यहां हो रहे पशु चिकित्सक के रिक्त पद ने पशुपालकों के सामने गंभीर समस्या पैदा कर रखी है। यहां पदस्थ वेटरनरी कंपाउंडर नवल मीणा कभी-कभी तो विभागीय कार्य से बार-बार बाहर होने की बात करते हैं तो कभी कभी पारिवारिक कार्यक्रमों में जाने की बात करते हैं। इससे पशुपालक न तो चिकित्सक मिलने और न ही कम्पाउन्डर मिलने से निराश होकर लौट जाते हैं। वर्तमान में यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का भी पद रिक्त है। इससे पशुपालकों को प्राथमिक उपचार भी नसीब नहीं हो पा रहा।

अक्सर निराश होकर लौटते हैं
आए दिन जब पशुपालक चिकित्सालय में समय पर पहुंचते हैं तो यहां अक्सर ताला लगा मिलता है। इससे परेशान होकर जब शनिवार को ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने चिकित्सालय परिसर पर ताला देख पशुचिकित्सा विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। ग्रामीणों ने चिकित्सक की नियुक्ति को लेकर भी अपना गुस्सा प्रकट करते हुए जल्द पशुचिकित्सक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मांग नहीं मानी गई तो जिला स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस पशु चिकित्सालय में पशुचिकित्सक की नियुक्ति की मांग को लेकर पहले भी कई बार विभाग सहित आला अफसरों, जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया। पर अब तक हाल वहीं के वहीं हैं। ऐसे में पशुपालक अपने पालतू और दुघारू मवेशियों को बीमार होने के बाद दम तोड़ते हुए देख रहे हैं। पशुपालकों को कभी कभी तो छोटी-छोटी बीमारियों को लेकर बाहर से मोटी रकम देकर चिकित्सक इलाज के लिए बुलाने पड़ रहे हैं। इसके कारण कुछ पशुपालक समय रहते अपने पशुओं की जान बचा पा रहे हैं। आसपास के करीब बारह से पंद्रह गांवों के पशुपालक यहां अपने पशुओं का इलाज कराने आते हैं। लेकिन चिकित्सक के बिना और समय पर कम्पाउन्डर न मिलने से निराशा ही हाथ लगती है।

- पशु चिकित्सालय में पदस्थापित कम्पाउन्डर की कई बार समय पर नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है। इसके कारण पशुपालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जल्द से जल्द कम्पाउन्डर को समय पर चिकित्सालय पहुंचने और उचित इलाज करने के लिए पाबंद किया जाएगा। जैसे ही पशुचिकित्सकों की वैकेंसी आएगी, सबसे पहले बामला को पशु चिकित्सक उपलब्ध करवाया जाएगा।
हरिबल्लभ मीणा, संयुकत निदेशक, पशुपालन विभाग, बारां