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जाग भी जाओ सरकार, किसान करेंगे बेड़ापार

जिले में बरसाती जल के संचय के लिए अभी करने होंगेे और प्रयास, शाहाबाद व किशनगंज क्षेत्र के किसानों के लिए बने ठोस योजनाएं
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बारां

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Ghanshyam Dadhich

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Updated: 26 Aug 2021, 9:48 PM IST

जाग भी जाओ सरकार, किसान करेंगे बेड़ापार

जाग भी जाओ सरकार, किसान करेंगे बेड़ापार

बारां. जिले में बरसात के दौरान छोटी, बड़ी नदियां पूरे उफान पर रहती हैं। मानसून सत्र में इन नदियों से लाखों क्यूबिक मीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। बाद में रबी के सीजन के लिए किसान फसलों की सिंचाई के साथ सैकड़ों गांवों के बाशिंदें जल संकट से जूझते हैं। हाल ही में राज्य सकार ने पार्वती व किशनगंज क्षेत्र की बाणगंगा नदी पर पांच एनिकट बनाने को मंजूरी दी है। लेकिन अगर जिले में ४८३ किमी में बहने वाली ९ बड़ी नदियों के जल के संचय की ठोस योजना अमल में लाई जाए तो प्रदेश के कृषि प्रधान जिलों में शामिल बारां के किसानों को फसल उत्पादन की बड़ी ताकत मिल सकती है। हालांकि जिले से होकर बहने वाली परवन नदी पर परवन वृहद् सिंचाई परियोजना का कार्य चल रहा है। इससे बारां जिले की छह व झालावाड़ व कोटा जिले की एक-एक तहसीलों की करीब २ लाख १ हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। परियोजना का बांध झालावाड़ जिले में बन रहा है, लेकिन इसका सर्वाधिक लाभ बारां जिले के किसानों को ही मिलेगा।

जिले में हैं 19 छोटे, बड़े बांध
जल संसाधन विभाग के अधीन जिले में 18 छोटे, बड़े बांध के अलावा पार्वती व परवन नदियों पर 3 पिकअप वियर हैं। इनसे जिले की लगभग 76 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। लेकिन पानी की कमी के चलते रबी की फसलों के दौरान इन सिंचाई स्रोतों से जुड़ी नहरों में जलप्रवाह थम जाता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को नलकूपों से सिंचाई करनी पड़ती है। जल संसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिलेभर में किसानों ने बड़ी संख्या में नलकूप खुदवाए हुए हैं। इससे जिले के भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आती है तथा बांध व तालाब रीतने लगते हैं।

चम्बल से मिलता है संबल
जिले की अन्ता व मांगरोल तहसीलों के किसानों के लिए चम्बल सिंचाई बरसों से वरदान बनी हुई है। अन्ता निवासी वरिष्ठ साहित्यकार नाथूलाल निडर बताते हैं कि चम्बल की दायीं मुख्य नहर का उद्घाटन देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू में १९ नवम्बर 1960 को कोटा के सकतपुरा से किया था। इसके बाद से अन्ता व मांगरोल क्षेत्र के किसानों की तकदीर संवर गई। कृषि अधिकारी बताते हैं कि दायीं मुख्य नहर से इन दोनों तहसीलों की करीब 65 हजार बीघा भूमि सिंचित होती है।

फिर क्यो रहे कोई कसर
जल संसाधन व कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि वर्तमान में जिले बांध, तालाब व दायीं मुख्य नहर से 1.41 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचति होती है। जिले में कृषि योग्य भूमि का कुल क्षेत्रफल 3.40 लाख हैक्टेयर है। परवन वह्द सिंचाई परियोजना के शुरू होने के बाद जिले में शाहाबाद व किशनगंज तहसील के नाहरगढ़ क्षेत्र की हजारों हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई से वंचित रहेगी। ऐसे में इन इलाकों पर फोकस किया जाना चाहिए। यहां सिंचाइ्रध् की सुविधा उपलब्ध होने पर बारां जिला श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों को फसल उत्पादन में पीछे छोड़ सकता है।
बारां जिले की प्रमुख नदियां जिले में बहाव की लम्बाई
पार्वती नदी 125 किमी
परवन नदी 120 किमी
ल्हासी नदी 60 किमी
अंधेरी नदी 45 किमी
कुनु नदी 33 किमी
घड़ावली नदी 26 किमी
बिलास नदी 25 किमी
बैथली नदी 25 किमी
बरनी नदी 24 किमी
(स्रोत-जल संसाधन विभाग, बारां)