बारां. जिले में बरसात के दौरान छोटी, बड़ी नदियां पूरे उफान पर रहती हैं। मानसून सत्र में इन नदियों से लाखों क्यूबिक मीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। बाद में रबी के सीजन के लिए किसान फसलों की सिंचाई के साथ सैकड़ों गांवों के बाशिंदें जल संकट से जूझते हैं। हाल ही में राज्य सकार ने पार्वती व किशनगंज क्षेत्र की बाणगंगा नदी पर पांच एनिकट बनाने को मंजूरी दी है। लेकिन अगर जिले में ४८३ किमी में बहने वाली ९ बड़ी नदियों के जल के संचय की ठोस योजना अमल में लाई जाए तो प्रदेश के कृषि प्रधान जिलों में शामिल बारां के किसानों को फसल उत्पादन की बड़ी ताकत मिल सकती है। हालांकि जिले से होकर बहने वाली परवन नदी पर परवन वृहद् सिंचाई परियोजना का कार्य चल रहा है। इससे बारां जिले की छह व झालावाड़ व कोटा जिले की एक-एक तहसीलों की करीब २ लाख १ हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। परियोजना का बांध झालावाड़ जिले में बन रहा है, लेकिन इसका सर्वाधिक लाभ बारां जिले के किसानों को ही मिलेगा।