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प्यासा अटरू : जरूरत प्रतिदिन 40 लाख पानी की और मिल रहा 21 लाख लीटर, कैसे बुझेगी प्यास

89 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं बुझी प्यास

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बारां

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Mukesh Gaur

Apr 19, 2022

प्यासा अटरू : जरूरत प्रतिदिन 40 लाख और मिल रहा 21 लाख लीटर, कैसे बुझेगी प्यास

प्यासा अटरू : जरूरत प्रतिदिन 40 लाख और मिल रहा 21 लाख लीटर, कैसे बुझेगी प्यास

अटरू. भले ही पूववर्ती सरकार ने कस्बे की प्यास बुझाने के लिए 89 करोड़ खर्च करके शेरगढ़ से अटरू पेयजलापूर्ति के लिए नई लाइन बिछाकर, टंकियां बनाकर पेयजल आपूर्ति सुचारू करने का प्रयास किया।लेकिन अभी भी अटरू की जनता को एकांतरे जलापूर्ति हो रही है। यहां की जनता उसमें भी संतुष्ट हैं। लेकिन वह पानी भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। इससे लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

नलकूपों पर निर्भर
जलदाय विभाग के सूत्रों के अनुसार शेरगढ़ से अटरु के लिए 21 लाख लीटर पानी प्रतिदिन दिया जा रहा है। एकांतरे जलापूर्ति के लिए भी पर्याप्त नहीं है, ऐसे में अटरू की पुरानी स्कीम के 7 नलकूपों से भी पानी लिया जाता है। आए दिन नलकूप की मोटर जलने, स्टार्टर जलने या अन्य समस्या आने से एक भी नलकूप बंद हो जाए तो 2 लाख लीटर पानी कम पड़ जाता है। इससे सप्लाई प्रभावित होती है। इसके अलावा शेरगढ़ से आने वाली पाइपलाइन का टूटना, बिजली नहीं आना। यह आएदिन की समस्या है। इसके अलावा भी कई कारणों से जल आपूर्ति प्रभावित हो जाती है।

40 लाख लीटर की आवश्यकता
जलदाय विभाग के सूत्रों ने बताते हैं कि अटरु नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए 40 लाख लीटर पानी प्रतिदिन की जरूरत है। इसी के बाद एकांतरे जलापूर्ति सुचारू हो सकती है। सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार को भी शेरगढ़ से अटरू आने वाली मुख्य पाइपलाइन टूट जाने से रविवार को जलापूर्ति प्रभावित हुई। सवेरे होने वाली सप्लाई शाम को भी पर्याप्त नहीं हुई। भाजपा नेता कृष्ण मुरारी दिलावर, मुकेश मिश्रा, रामबाबू वैष्णव आदि ने कहा कि पानी को लेकर अटरू की जनता ने 2010 में गैरराजनीतिक आंदोलन खड़ा किया और दो हजार लोगों को पैदल बारां ले जाकर जिला कलक्टर के सामने यह मांग रखी। तब जाकर सरकार ने 90 करोड़ रुपए का नया प्लान बनाया, लेकिन स्थानीय जलदाय विभाग के कर्मचारी, प्रशासन व सरकार में बैठे नुमाइंदे इस सिस्टम को फॉलो नहीं कर पाए। न ही इस योजना पर अभी तक राज्य सरकार ने एक पैसा खर्च किया। इससे यह योजना विफल होती नजर आ रही है। अगर प्रशासन ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो आम जनता को लेकर आंदोलन करना पड़ेगा।

विभाग देता है नियमों का हवाला
जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता अनिल गोचर से जब भी इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि हम नियमानुसार पूरा पानी लोगों को दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग 70 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति के हिसाब से पानी दे रहा है।