26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फिर मौसम ने बिगाड़ दिया पैदावार का गणित, खेतों में पसरी अफीम की फसल

मौसम बिगड़ा, तेज हवा से कई फसलों को पहुंचा नुकसान  

3 min read
Google source verification

बारां

image

Mukesh Gaur

Feb 26, 2024

फिर मौसम ने बिगाड़ दिया पैदावार का गणित, खेतों में पसरी अफीम की फसल

फिर मौसम ने बिगाड़ दिया पैदावार का गणित, खेतों में पसरी अफीम की फसल

हरनावदाशाहजी इलाके में एक सप्ताह से बिगडे मौसम के मिजाज ने धरतीपुत्रों की उम्मीदों पर एक बार फिर कुठाराघात किया है। कड़ी मेहनत एवं सुरक्षा के साथ खेतों में तैयार की अफीम की फसल में चीरा लगाने का काम शुरू होने के साथ ही तेज हवाओं ने खेतों में फसल के बिछौने लगा दिए। इससे न केवल अफीम के दूध का उत्पादन प्रभावित हुआ, बल्कि पौधे तक आडे पड गए जिससे बची आस भी टूट गई है। सारी मेहनत को ढेर होता देख काश्तकार ङ्क्षचता में पड़ गए। जिन्होंने चीरा लगाया ही था, उनके साथ तो सिर मुंंडाते ही ओले पडने वाली कहावत चरितार्थ हो गई। जबकि शेष काश्तकार भी अब डूबते को तिनके का सहारा लेने के लिए विभागीय शरण में जाने की तैयारियों में जुटने की तैयारी में लग गए हैं। तेज हवाओं ने सर्वाधिक नुकसान अफीम, उसके बाद सरसों, धनिया एवं चने समेत अन्य फसलों में भी हुआ है।

दिनरात की थी मेहनत

इस बार नारकोटिक्स विभाग द्वारा सीपीएस के तहत नए काश्त लाइसेंस जारी किए जाने के बाद अफीम का रकबा बढकऱ तीन गुना हो गया था। ऐसे में इन दिनों दूर दूर तक खेतों में अफीम के सफेद फूलों के नजारे हैं। काश्तकारों ने बताया कि दिनरात की चौकसी के साथ फसल की सुरक्षा की। पौधों को हवा के प्रकोप से बचाने के लिए लकडिय़ों के सहारे दिए, वहीं पक्षियों से बचाने के लिए जाल लगाकर खर्चा भी किया। ऐनवक्त पर प्राकृतिक आपदा ने फिर से सारा औसत बिगाड़ दिया है। सीपीएस के तहत जारी नए काश्त लाइसेंस वाले काश्तकारों को तो डोडों में चीरा नहीं लगाना था, लेकिन जिन पुराने काश्तकारों को फसल में चीरा लगाना था। उनकी मुसीबत बढ़ गई है। सबसे ज्यादा मुश्किल उनकी है जिन्होंने चीरा लगाया ही था कि तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया।

यह दूसरा मौका

अफीम काश्तकार देवीलाल राठैार ने बताया कि तीन दशक से अफीम की खेती कर रहे है और यह दूसरा मौका है जब अफीम को विभागीय देखरेख में हंकवाने के लिए विभाग को प्रार्थना पत्र देना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस बार फसल अच्छी स्थिति में थी। डोडों का आकार अच्छा होने से औसत एवं दाना पोस्ता बढिय़ा निकलने की उम्मीद थी, लेकिन फसल तहसनहस हो गई। दस आरी की फसल खेत में पसर गई। इससे चीरा लगाने की उम्मीद समाप्त हो गई। अब विभाग को प्रार्थना पत्र देने की तैयारी है।

सीपीएस से बढा रकबा

नारकोटिक्स विभाग के जिला अफीम अधिकारी आर के रजत ने बताया कि कोटा मंडल में विभाग की नई सीपीएस नीति सहित कोटा व बारां जिले के मिलाकर कुल 6225 लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें भी लगभग आठ सौ से अधिक लाइसेंस कोटा जिले में हैं। शेष छबड़ा, छीपाबड़ौद व अटरु तहसील में हैं। इनमें भी 1700 लाइसेंस ही चीरा योग्य हैं। इन दिनों प्राकृतिक आपदा से फसल में व्यापक खराबा होने की सूचना मिल रही है। उनके पास काश्तकारों से आई सूचना के आधार पर रिपोर्ट तैयार होकर पॉलिसी आती है। तब काश्तकारों को रियायत दी जाती है। बाकि तो विभागीय निगरानी में नष्टीकरण के लिए आवेदन लेकर राहत दी जाती है।

इस बार 188 काश्तकारों को मिला है लाइसेंस

अफीम लम्बरदार गुलाबचंद नागर ने बताया कि हरनावदाशाहजी क्षेत्र में इस वर्ष कुल 188 काश्तकारों को अफीम काश्त लाइसेंस मिले हैं। इनमें से पांच दर्जन लाइसेंस ही चीरा लगाने वाले थे शेष सीपीएस के थे। चार-पांच दिनों से चल रही तेज हवाओं ने काश्तकारों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उन्होंने बताया कि फसल में फूलाव व फलाव के बाद ज्यादातर काश्तकार चीरा लगाने की तैयारी कर चुके थे। लेकिन तेज हवाओं से बिगडी फसल की सूरत के चलते सारी तैयारियां धरी रह गई। जबकि करीब तीस फीसदी काश्तकारों ने तो चीरा लगा भी दिया। ऐसे में अब उनके औसत पूरा करने को लेकर ङ्क्षचता हो गई है। जानकारी के अनुसार किसी प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से डोडों में चीरा नहीं लगाने पर फसल को विभागीय निगरानी में नष्ट करवाकर लाइसेंस को बहाल रखने की कवायद की जाती है। लेकिन चीरा लगाने के उपरांत एक निर्धारित मात्रा में अफीम का दूध संचित करके विभाग को तौल कराना पडता है। ऐसे हालात में अब काश्तकार औसत पूरा नही हो पाने के कारण विभाग से राहत की मांग को लेकर शरण में जाने की तैयारी करने लगा है।