
बारां जिले के देवरी में ऐसा क्या हुआ कि गांव हुए खाली, घरों पर लटके ताले
देवरी. शाहाबाद के तलहटी में हुई अतिवृष्टि के कारण किसानों की फसलें चौपट हो गई। कई खेत भी पूरी तरह से बंजर बन गए। जिसके चलते क्षेत्र के लोगों को रोजगार सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
क्षेत्र के आदिवासी सहरिया लोगों को आस-पास के गांवो में भी रोजगार नहीं मिल रहा है। पहले खरीफ की फसल की कटाई, थ्रेसिंग सहित अन्य कामों में कुछ मात्रा में रोजगार मिल जाता था, लेकिन क्षेत्र की फसलें तबाह होने के कारण अब लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार नही मिल रहा है। मटियाखारा, चोराखाड़ी, हरिनगर, पठारी गांवो में मनरेगा बन्द है। इस कारण लोगो को रोजगार नही मिल रहा था। रोजगार नही मिलने से लोग पलायन कर गए और अन्य गांवो के लोग भी पलायन कर रहे हंै। गांव के गांव खाली हो रहे हंै। हरिनगर में मात्र 40-50 लोग बचे हैं। जबकि इस गांव में करीब 400 के करीब लोग है। यह गांव सहरिया बाहुल्य है।
घरों पर लटक रहे ताले
मध्यप्रदेश सीमा पर सुविधाओं के नाम पर कुछ नही है। इन गांवों में रोजगार का अभाव रहता है। जिसके चलते लोग अपने घरों पर ताले लगाकर पूरे परिवार के साथ अन्य राज्यों के लिए पलायन कर गए हैं। क्षेत्र की सभी सहरिया बस्तियों में यही हाल देखने को मिल रहे हैं। बस्तियों में मिले बुजुर्गों का कहना है कि इस वर्ष अत्यधिक बारिश होने से खेती पूरी तरह नष्ठ हो गई। रोजगार का संकट हो गया। गांव के लोगों ने बताया कि बारिश में हमारी फसलें नष्ट हो गई। थोड़ी बहुत खेती बची थी, वह हाल ही में हुई बारिश से पूरी तरह सड़ गई। सरकार ने अतिवृष्टि से हुए नुकसान का अभी तक फसल का मुआवजा भी नही दिया है। जाग्रत महिला संगठन की महिलाओं ने बताया कि लंबे से इन गांवों में मनरेगा बन्द पड़ा हुआ है। इस कारण लोगो के पास रोजगार नही था। रोजगार के लिए लोग मध्यप्रदेश पलायन कर गए हैं।
Published on:
23 Oct 2021 09:31 pm
बड़ी खबरें
View Allबारां
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
