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जिले में एक तिहाई मयखाने खुले हैं महिलाओं के नाम, बदलेगी कमान

ग्रामीण कस्बाई क्षेत्र में शराब का व्यापार और उसके विरोध का साथ है। इस मामले में महिलाओं की भूमिका भी कम नहीं है।
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जांजगीर चंपा

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Shailendra Tiwari

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Updated: 31 Mar 2017, 11:32 AM IST

ग्रामीण कस्बाई क्षेत्र में शराब का व्यापार और उसके विरोध का साथ है। इस मामले में महिलाओं की भूमिका भी कम नहीं है। कहीं महिलाओं की ओर से शराब की दुकानें बंद कराने के लिए तेवर दिखाए जा रहे तो कहीं शराब की दुकान चलाने के लिए हाथ बढ़ाए जा रहे हंै।

जिले में भी 141 समूहों के लिए सैकड़ों महिलाओं ने शराब की दुकान चलाने के लिए आवेदन किए थे। इनमें से करीब 50 महिलाओं के नाम लॉटरी लगी है। इनमें बारां शहर में अंग्रेजी शराब की 6 में से 4 दुकानें खुली है। अब महिलाओं की इन दुकानों को पुरुष संभालेंगे। शनिवार से जिले में मदिरा समूहों की कमान बदल जाएगी।

कोई भी ले सकता है लाइसेंस

देश के कई राज्यों में शराब परप्रतिबंध लगाया जा रहा है। इसका एक कारण महिलाओं का आक्रोश भी है। जबकि प्रदेश में शराब पर प्रतिबंध की मांग तो हो रही है, लेकिन सरकार पर दबाव नहीं बन रहा। इस धंधे में मोटा मुनाफा होने से महिलाएं भी लाइसेंस की दौड़ में आगे रहती है, हालांकि दुकान के लिए आवेदन से लेकर बिक्री तक के सारे काम पुरुष ही संभालते हैं। महिला एवं पुरुषों के लिए लाइसेंस के लिए एक समान ही नियम है।

ऐसे चला सकती है कारोबार

चयनित अनुज्ञाधारी व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद उसके प्रतिनिधि के रूप में सेल्समैन को दुकान पर दुकानदारी के लिए अधिकृत कर सकता है। इसके लिए उसका नौकरनामा बनाया जाता है। अनुज्ञाधारी का खुद दुकान पर मौजूद रहना अनिवार्य नहीं है। इस प्रावधान ने महिलाओं के लाइसेंस लेने का और भी आसान कर दिया है।

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