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विश्व धरोहर दिवस आज : रामगढ़ क्रेटर पर किए जा रहे विकास कार्य

आज विश्व धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर मानव सभ्यता से जुड़े बारां जिले के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने की महती आवश्यकता है।

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बारां

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Mukesh Gaur

Apr 18, 2025

आज विश्व धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर मानव सभ्यता से जुड़े बारां जिले के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने की महती आवश्यकता है।

आज विश्व धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर मानव सभ्यता से जुड़े बारां जिले के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने की महती आवश्यकता है।

ऐतिहासिक विरासत को संरक्षा और सुरक्षा की जरूरत

बारां. आज विश्व धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर मानव सभ्यता से जुड़े बारां जिले के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने की महती आवश्यकता है। जिले में प्राचीन युग के कई अवशेष है। यहां अनोखे और विविध दर्शनीय स्थलों का खजाना है। बारां की प्राकृतिक सुन्दरता, शक्तिशाली किले, सुन्दर मन्दिर समूह और उनकी वास्तुकला दर्शनीय है। इनके संरक्षण को लेकर पुरातत्व विभाग व पर्यटन विभाग समेत विभिन्न सरकारी गैर सरकारी संस्थानों के स्तर पर प्रयास किए जा रहे है, लेकिन मौजूदा समय में किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। बारां से 40 किमी दूर रामगढ़ क्रेटर राजस्थान ही नहीं देश की अनोखी भौगोलिक धरोहर है। इसे करीब 75000 साल पहले उल्काङ्क्षपड के पृथ्वी से टकराने के परिणामस्वरूप बना हुआ माना जाता है। यह भारत में ज्ञात चार क्रेटरों में से एक है। क्रेटर का व्यास 3.5 किमी है। रामगढ़ क्रेटर को राष्ट्रीय महत्व का भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित किया गया है।

रामगढ़ भंडदेवरा मंदिर : 40 किमी दूरी पर शिवजी को समर्पित 10वीं शताब्दी का मन्दिर है। इसकी वास्तुकला खजुराहो शैली से मिलती है, इसलिए इसे मिनी खजुराहो भी कहा जाता है। यह मंदिर एक छोटे से तालाब के किनारे स्थित है।
शाहाबाद किला : 80 किमी दूर 16वीं शताब्दी में चौहान राजपूत मुकुटमणि देव द्वारा निर्मित शाहबाद का किला है। घने जंगली इलाके में सीना ताने यह किला, कुंडा खोह घाटी से घिरा है। इसकी दीवारें उल्लेखनीय संरचनाओं से सुसज्जित हैं। यहां वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध शाहाबाद की शाही जामा मस्जिद है। इसका प्रारूप दिल्ली की जामा मस्जिद को देखकर बनाया गया।

शेरगढ़ किला : 65 किमी की दूरी पर परवन के किनारे शेरगढ़ किला लोकप्रिय किलों में से एक है। विभिन्न राजवंशों के शासन में शेरगढ़ को अपना नाम शेरशाह सूरी द्वारा कब्जा करने के बाद मिला। इसका मूल नाम कोषवर्धन था। 790 ईस्वी का एक शिलालेख शेरगढ़ किले के भव्य इतिहास को दर्शाता है।

सीताबाड़ी : 45 किमी दूर सीता माता और लक्ष्मण को समर्पित मन्दिर है। मान्यता है कि भगवान राम और सीता के दोनों पुत्र लव और कुश का जन्म यहीं पर हुआ था। इसमें कई ऐतिहासिक कुण्ड भी हैं। यहां प्रसिद्ध सीताबाड़ी मेला लगता है। यह धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां पर रामायण काल से जुड़े स्थल भी इसे खास बनाते हैं।

काकूनी मन्दिर समूह : 85 किमी की दूर परवन नदी के तट पर काकूनी 8वीं सदी के वैष्णव देवताओं और भगवान शिव के मन्दिरों का समूह है। यहां राजा भीम देव द्वारा निर्मित भीमगढ़ किले के अवशेष भी दर्शनीय हैं। काकूनी मंदिरों से कई मूर्तियों को सुरक्षा की ²ष्टि से कोटा और झालावाड़ के संग्रहालयों में रखा गया। पूर्व में कई मूर्तियां यहां से चोरी भी हुई है। इसके अलावा लाल पत्थर से निर्मित नाहरगढ़ किला। बारां से 65 और छबड़ा से 8 किमी दूर पहाड़ी पर खड़ा गूगोर किला है। रामगढ़ माता मंदिर ऐतिहासिक महत्व के चलते पर्यटक का आकर्षण है। शाहाबाद रोड पर नक्काशीदार खंभों, तोरणों आदि के साथ 9वीं-10वीं शताब्दी में बना बांसथुनी का सुंदर मंदिर है। यह भगवान विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति होने से प्रसिद्ध है।