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बरेली स्मार्ट सिटी के लिए 75 करोड़ स्वीकृत, सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा, 12 करोड़ और मिलेंगे

उत्तर प्रदेश के बरेली शहर को स्मार्ट सिटी 2.0 योजना के तहत एक बड़ा प्रोजेक्ट मिलने जा रहा है। जयपुर में आयोजित 12वें रीजनल थ्री आर (रिड्यूस, रीयूज, रिसाइकल) और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में बरेली स्मार्ट सिटी को केंद्र सरकार द्वारा 75 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

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बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर को स्मार्ट सिटी 2.0 योजना के तहत एक बड़ा प्रोजेक्ट मिलने जा रहा है। जयपुर में आयोजित 12वें रीजनल थ्री आर (रिड्यूस, रीयूज, रिसाइकल) और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में बरेली स्मार्ट सिटी को केंद्र सरकार द्वारा 75 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना की कुल लागत 87 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें बाकी 12 करोड़ रुपये का योगदान नगर निगम बरेली करेगा।

स्मार्ट सिटी 2.0 में बरेली का चयन, एमओयू पर हुए हस्ताक्षर

जयपुर में हुए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ संजीव कुमार मौर्य, भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव रूपा मिश्रा (आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय) और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर निदेशक ऋतु सुहास (नगर विकास विभाग) ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। स्मार्ट सिटीज 2.0 योजना के तहत देशभर से 18 शहरों का चयन किया गया है, जिसमें बरेली भी शामिल है।

सर्कुलर इकोनॉमी और अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर

सीईओ संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) को प्रभावी बनाना और शहर को गार्बेज-फ्री करना है। इसके तहत बरेली में एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

आर्थिक और तकनीकी सहायता में प्रमुख संस्थाएं होंगी सहयोगी

परियोजना को सफल बनाने के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB), जर्मन विकास बैंक (KfW), फ्रांसीसी विकास एजेंसी (AFD) और यूरोपीय संघ से आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिलेगा। ये संस्थाएं बरेली में स्मार्ट और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं को लागू करने में सहयोग करेंगी।

शहर की स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में होगा सुधार

इस परियोजना के तहत बरेली में स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक कचरा निपटान तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे न केवल शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।