
बरेली। रेलवे के करोड़ों के टेंडर में दस्तावेजों की बाजीगरी का बड़ा मामला सामने आया है। इंजीनियरिंग विभाग की शिकायत पर इज्जतनगर थाने में पटेलनगर निवासी ठेकेदार अजय के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि करीब 22 करोड़ रुपये की पांच निविदाओं में फर्जी और अमान्य दस्तावेज लगाकर विभाग को गुमराह किया गया।
इज्जतनगर मंडल रेल प्रबंधक (इंजीनियरिंग) भारत भूषण की ओर से दर्ज कराई गई तहरीर में कहा गया है कि मैसर्स अजय कंस्ट्रक्शन, सी-594 पटेलनगर बरेली ने निर्धारित न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा किए बिना ही निविदाओं में भाग लिया। आरोप है कि अमान्य और शून्य पार्टनरशिप डीड को कूटरचित तरीके से तैयार किया गया और दूसरी फर्म ‘मैसर्स नरेन्द्र देव रेलवेज बरेली’ के तकनीकी क्रेडेंशियल जानबूझकर अपने पक्ष में प्रस्तुत किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन पांच टेंडरों में ऑफर लगाया गया, उनमें वित्तीय और तकनीकी पात्रता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। बावजूद इसके विभाग को भ्रमित कर निविदा प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशिश की गई।
मामला तब पकड़ में आया जब पूर्वोत्तर रेलवे के सतर्कता विभाग ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच रिपोर्ट में फर्जी पार्टनरशिप डीड और तकनीकी क्रेडेंशियल के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। इसके बाद रेल मंडल प्रबंधक (इंजीनियरिंग) भारत भूषण ने इज्जतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों की सत्यता, वित्तीय लेनदेन और संबंधित फर्मों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
मामले पर ठेकेदार अजय कुमार का कहना है कि इस प्रकरण में पहले भी उनके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। रेल बोर्ड ने फर्म को दो साल के लिए प्रतिबंधित किया था और पेनाल्टी लगाई गई थी। सिक्योरिटी मनी जब्त की जा चुकी है। उनका दावा है कि 22 करोड़ के टेंडर का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
Updated on:
26 Feb 2026 11:15 am
Published on:
26 Feb 2026 11:14 am
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