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युगवीणा लाइब्रेरी में सजा भारतीय हस्तकला उत्सव… एक ही छत के नीचे चमकी देशभर की शिल्प विरासत

बरेली कैंट स्थित युगवीणा लाइब्रेरी में 25 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक आयोजित ‘भारतीय हस्तकला उत्सव’ में देशभर के कारीगर अपनी हस्तनिर्मित कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनी-सह-बिक्री इस आयोजन में हैंडलूम, वुडन टॉयज़, लेदर क्राफ्ट, ज्वेलरी और पेंटिंग्स की आकर्षक श्रृंखला उपलब्ध है।

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बरेली। कैंट क्षेत्र स्थित युगवीणा लाइब्रेरी परिसर में बुधवार से भारतीय हस्तकला उत्सव हैंडीक्राफ्ट्स प्रदर्शनी का रंग जम गया। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की ओर से 25 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक आयोजित यह प्रदर्शनी-सह-बिक्री मेला शहरवासियों के लिए देशभर की पारंपरिक कारीगरी को करीब से देखने और खरीदने का सुनहरा अवसर लेकर आया है।

मेयर ने किया उद्घाटन, कारीगरों से किया संवाद

उद्घाटन समारोह में बरेली के मेयर डॉ. उमेश गौतम मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ कैंट बोर्ड सीईओ डॉ. तनु जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगर शामिल हुए। अतिथियों ने स्टॉलों का अवलोकन किया और शिल्पकारों से सीधा संवाद कर उनके हुनर और उत्पाद विविधता की सराहना की। सभा को संबोधित करते हुए मेयर ने कहा कि यह आयोजन न सिर्फ भारत की समृद्ध शिल्प विरासत का उत्सव है, बल्कि कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमों को सीधे बाजार से जोड़ने की सार्थक पहल भी है। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से अपील की कि वे हस्तनिर्मित उत्पादों को अपनाकर कारीगरों का उत्साह बढ़ाएं और वोकल फॉर लोकल को मजबूत करें।

इंडिया हैंडमेड को बढ़ावा देने की पहल

ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि यह उत्सव घरेलू बाजार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। ऐसी प्रदर्शनियां हस्तनिर्मित उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं और देश की जीवंत शिल्प परंपरा पर गर्व की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। उपाध्यक्ष सागर मेहता ने बताया कि बरेली में आयोजित यह आयोजन मजबूत रिटेल अवसर लेकर आया है, जहां खरीदार एक ही स्थान पर हैंडलूम और हस्तशिल्प की विस्तृत श्रृंखला देख सकते हैं। साथ ही कारीगरों को उत्पाद प्रस्तुति, पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप तैयारी पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, ताकि स्थायी घरेलू व्यापार को बढ़ावा मिले।

देशभर की कलाओं का संगम

प्रदर्शनी में चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, जोधपुर का लेदर क्राफ्ट, संभल की हस्तनिर्मित ज्वेलरी, आगरा की पत्थर नक्काशी, हुबली की हाथ कढ़ाई, इंदौर की भील पिथोरा पेंटिंग समेत अनेक क्षेत्रीय शिल्प आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। निर्यात-गुणवत्ता वाले होम डेकोर, लाइफस्टाइल, फर्नीचर और फैशन ज्वेलरी उत्पादों की विविधता ने आगंतुकों को प्रभावित किया। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने बताया कि परिषद क्षेत्रीय शिल्पों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने में निरंतर प्रयासरत है। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 में भारत से हस्तशिल्पों का कुल निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (करीब 3,918 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जो इस क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है।

सुबह 11:30 से रात 8 बजे तक खुला रहेगा मेला

यह आयोजन बिजनेस-टू-कंज्यूमर (बी2सी) प्रारूप में हो रहा है, जहां ऑन-द-स्पॉट बिक्री को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मेला प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे से रात 8:00 बजे तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि प्रदर्शनी न केवल कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराएगी, बल्कि बरेली के नागरिकों को भी देश की विविध सांस्कृतिक विरासत से रू-ब-रू कराएगी। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद देश में हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने वाली अग्रणी संस्था है, जो लाखों कारीगरों और शिल्पकारों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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