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सीमा के सपूतों को नमन… आईटीबीपी ने मनाया पूर्व सैनिक दिवस, वीरों को दिया गौरवपूर्ण सम्मान

वर्दी भले ही उतर जाए, लेकिन राष्ट्रभक्ति और बलिदान की पहचान कभी फीकी नहीं पड़ती। बुधवार को क्षेत्रीय मुख्यालय (बरेली) और तृतीय वाहिनी, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ने संयुक्त रूप से पूर्व सैनिक दिवस मनाते हुए सेवानिवृत्त जवानों को सम्मानित किया।

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बरेली। वर्दी भले ही उतर जाए, लेकिन राष्ट्रभक्ति और बलिदान की पहचान कभी फीकी नहीं पड़ती। बुधवार को क्षेत्रीय मुख्यालय (बरेली) और तृतीय वाहिनी, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल ने संयुक्त रूप से पूर्व सैनिक दिवस मनाते हुए सेवानिवृत्त जवानों को सम्मानित किया। समारोह में जोश, गर्व और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

डीआईजी अवनीश के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता तृतीय वाहिनी के सेनानी पवन सिंह ने की। मंच से पूर्व सैनिकों के योगदान को याद करते हुए कहा गया कि ये केवल सेवानिवृत्त कार्मिक नहीं, बल्कि संगठन की नींव हैं। जिन कंधों पर देश की सीमाओं की सुरक्षा टिकी रही, उनका सम्मान करना बल का कर्तव्य है, औपचारिकता नहीं।

संघर्ष की कहानियां, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैनिकों के साथ खुला संवाद हुआ। कई पूर्व जवानों ने अपने सेवा काल की कठिन परिस्थितियों, सीमाई चुनौतियों और कर्तव्यनिष्ठा के अनुभव साझा किए। बर्फीले मोर्चों से लेकर संवेदनशील इलाकों तक की ड्यूटी का जिक्र होते ही सभागार तालियों से गूंज उठा। अधिकारियों ने कहा कि पूर्व सैनिकों का अनुभव वर्तमान पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। उनकी तपस्या ही आज की मजबूत कार्यसंस्कृति की आधारशिला है।

संगठन सदैव साथ खड़ा रहेगा

सेनानी पवन सिंह ने अपने संबोधन में सभी पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त कार्मिकों के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बल अपने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि सेवा काल समाप्त होने के बाद भी उनका संबंध संगठन से कभी समाप्त नहीं होता। समारोह में सभी पूर्व सैनिकों को मंच पर आमंत्रित कर स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कई चेहरों पर गर्व की चमक थी, तो कई आंखों में वर्षों की सेवाओं की यादें छलक उठीं।