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अबकी बार नहीं रुकेगा बरेली कॉलेज: केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने की मांग ने पकड़ी रफ्तार, शिक्षा मंत्री के पत्र से दिल्ली तक मचा हलचल

बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। लंबे समय से फाइलों में दबा यह मुद्दा अब दिल्ली तक गूंजने लगा है।

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बरेली। बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। लंबे समय से फाइलों में दबा यह मुद्दा अब दिल्ली तक गूंजने लगा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पत्र ने इस मांग को नई धार दे दी है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।

सांसद के पत्र पर केंद्र की ‘कार्रवाई’, गेंद अब अफसरों के पाले में

शिक्षा मंत्री ने बरेली के सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार को भेजे जवाब में साफ किया है कि 8 मार्च 2026 को भेजे गए प्रस्ताव को संबंधित विभाग को अग्रेषित कर दिया गया है। हालांकि यह जवाब औपचारिक जरूर है, लेकिन इससे इतना तो तय है कि मामला अब ठंडे बस्ते में नहीं पड़ा है और केंद्र स्तर पर इसकी फाइल चल पड़ी है। अगर बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलता है, तो यह पूरे रुहेलखंड के लिए शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। अभी तक सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को अत्याधुनिक सुविधाएं, बड़े स्तर पर रिसर्च के अवसर और राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिल सकेगी। यह फैसला बरेली को शिक्षा के नक्शे पर नई पहचान दिला सकता है।

वर्षों से उठ रही मांग, अब दिख रही है जमीन पर हलचल

बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग कोई आज की नहीं है। कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के बैनर तले यह मुद्दा लगातार उठता रहा है। जनप्रतिनिधियों से लेकर शिक्षाविदों तक ने समय-समय पर इसे जोर-शोर से उठाया, लेकिन हर बार यह मामला कागजों में उलझकर रह गया। शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद अब सबकी नजरें केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं। बरेली के लोगों को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ पत्राचार नहीं, बल्कि ठोस फैसला सामने आएगा। अगर फिर से मामला लटका, तो यह नाराजगी का कारण भी बन सकता है।