
बरेली। भोजीपुरा इलाके में चर्चित “अर्बन वाटिका” भूमि घोटाले में अदालत ने बड़ा झटका देते हुए आरोपी अंजू गंगवार की जमानत याचिका खारिज कर दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय, कोर्ट संख्या-1 ने साफ संकेत दिया कि फर्जीवाड़ा और दबंगई के दम पर जमीन हड़पने वालों को राहत नहीं मिलेगी।
मामले में सामने आया कि ओक इन्फ्रा डेवलपर्स ने वर्ष 2011 में असली वारिस आलोक कुमार गोयल से जमीन खरीदी थी। लेकिन इससे पहले ही 2010 में अंजू और मंजू गंगवार ने एक फर्जी “जय प्रकाश उर्फ जगदीश” खड़ा कर उसी जमीन का बैनामा करा लिया। बाद में कई स्तरों पर यह साबित हो चुका है कि असली मालिक की मौत 1985 में हो चुकी थी और फर्जीवाड़ा रचा गया था।
17 अक्टूबर 2022 को मामला तब भड़क गया जब आरोपी पक्ष के लोग साइट पर पहुंचे और कर्मचारियों को धमकाने लगे। आरोप है कि उन्होंने 80 लाख रुपये की रंगदारी मांगी और साफ कहा—“पैसा दो, वरना यहां न काम होगा, न प्लॉट बिकेंगे… नहीं माने तो अंजाम बुरा होगा।” इस धमकी से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
इसके बाद 21 दिसंबर 2022 को आरोपी 20-25 लोगों के साथ फिर साइट पर धावा बोलते हैं। डंडों और अवैध हथियारों से लैस इस भीड़ ने जेसीबी से दीवारें गिरा दीं और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। आरोप है कि यह पूरा गैंग संगठित तरीके से जमीनों पर कब्जा और वसूली करता है।
लगातार बढ़ते घटनाक्रम के बाद 24 दिसंबर 2022 को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, रंगदारी, मारपीट और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और उपलब्ध साक्ष्य भी मजबूत हैं। ऐसे में आरोपी को राहत देना उचित नहीं है। इसी के साथ अंजू गंगवार की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
कोर्ट के इस फैसले से भूमाफियाओं में हड़कंप मचा है। साफ है कि अब फर्जी कागज और धमकी के दम पर जमीन कब्जाने का खेल आसान नहीं रहेगा। वहीं पीड़ित पक्ष को भी इस फैसले से न्याय की उम्मीद मजबूत हुई है।
Updated on:
16 Apr 2026 09:09 pm
Published on:
16 Apr 2026 09:08 pm
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