
बरेली। आवास विकास परिषद में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। परिषद से सेवानिवृत्त कर्मचारी के पुत्र पर नियमों की अनदेखी कर पिता के नाम से संचालित फर्म को करोड़ों रुपये के टेंडर दिलाने के आरोप लगे हैं। मामला उजागर होने के बाद इसे परिषद मुख्यालय तक भेज दिया गया है, जिससे बरेली से लेकर लखनऊ तक विभाग में हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार, परिषद से रिटायर कर्मचारी के पुत्र विनय कुमार ने एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से खुद को परिषद में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात करा लिया। आरोप है कि इसी पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने पिता के नाम से संचालित काव्या इंटरप्राइजेज को टेंडर दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि हाल ही में काव्या इंटरप्राइजेज की ओर से करीब सवा करोड़ रुपये के टेंडर के लिए निविदा डाली गई है। इससे पहले भी उक्त फर्म को परिषद से कई कार्यों के टेंडर मिलने की बात सामने आई है।
टेंडर प्रक्रिया में लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्रों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निविदा में नियमों के विपरीत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं की गई है। मामले में यह भी आरोप हैं कि परिषद के कुछ अधिकारी और इंजीनियर पूरे घटनाक्रम से अवगत होने के बावजूद चुप्पी साधे रहे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों की इसी कथित मौन स्वीकृति के चलते यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा।
प्रकरण सामने आने के बाद इसे आवास विकास परिषद मुख्यालय भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक मुख्यालय स्तर से संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है और पूरे मामले की जांच के संकेत दिए गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल इस मामले में परिषद के जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन विभाग में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
इस संबंध में एक्सईएन राजेंद्र नाथ राम ने कहा विनय के पिता विभाग से रिटायर हुए थे। उनके नाम की फर्म बताई जा रही है। रिटायर होने के बाद कोई भी व्यक्ति टेंडर ले सकता है। इस मामले में संबंधित अधिकारी से जानकारी ली जा रही है।
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Published on:
07 Feb 2026 06:26 pm
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