
बरेली। देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत बरेली में मरीजों के लिए राहत नहीं, बल्कि लूट और धोखाधड़ी का जरिया बनती जा रही है। स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की जांच ने जिले के चार अस्पतालों में फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है, लेकिन इससे यह भी साफ हो गया है कि घोटाले की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं।
हकीकत यह है कि या तो मरीज शिकायत ही नहीं कर पाते, और जो हिम्मत जुटाकर शिकायत करते हैं, उन्हें जांच के नाम पर महीनों तक दौड़ाया जाता है, ताकि वे खुद ही हार मान लें। जानकारों का कहना है कि अगर शासन स्तर पर विशेष जांच टीम उतार दी जाए, तो बरेली ही नहीं, पूरे प्रदेश में आयुष्मान महाघोटाले का विस्फोट हो सकता है।
जिले में 3,49,970 परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से 90 प्रतिशत कार्ड बनने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इसी योजना के नाम पर गिरोह सक्रिय हैं, जो अस्पतालों की मिलीभगत से सरकारी खजाने पर डाका डाल रहे हैं। पारदर्शिता की बातें अब खोखले दावे बनकर रह गई हैं।
अक्टूबर महीने में 450 से अधिक आयुष्मान कार्ड हैक किए गए अकाउंट से बनाए गए और उन्हीं कार्डों पर इलाज दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद साचीज की टीम ने जांच शुरू की तो राधिका मैटरनिटी, मेट्रो विजन, उम्मीद हॉस्पिटल और अरबन हॉस्पिटल में फर्जी कार्ड और फर्जी लाभार्थियों का इलाज दिखाए जाने के सबूत मिले। अब इन अस्पतालों का मामला मेडिकल कमेटी के पास है और ब्लैकलिस्टिंग की तलवार लटक रही है, लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े खेल में अब तक कितने जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई।
यह पहला मामला नहीं है। जून 2025 में फरीदपुर में फर्जी आधार और आयुष्मान कार्ड बनाने का भंडाफोड़ हुआ। मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर पुलिस ने बिथरी चैनपुर और फरीदपुर में जनसेवा केंद्रों पर छापा मारकर फर्जी दस्तावेज, लैपटॉप और प्रिंटर बरामद किए। अगस्त में इज्जतनगर क्षेत्र में जनसेवा केंद्र की आड़ में आधार, ई-श्रम और आयुष्मान कार्डों का कारखाना चल रहा था। बदायूं निवासी रोहताश के नाम से फर्जी कार्ड बनाकर 50 हजार रुपये का भुगतान करा लिया गया। इज्जतनगर में मनोज शर्मा ने आरोप लगाया कि 5 से 20 हजार रुपये लेकर आयुष्मान कार्ड बनवाए जा रहे हैं।
भमोरा के झिझरी गांव की लक्ष्मी देवी का आरोप इस घोटाले की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। पति उर्वेश को सौ फुटा स्थित सनराइज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। आयुष्मान कार्ड देखने के बाद कहा गया कि इलाज मुफ्त होगा, लेकिन 25 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच करीब 5.50 हजार रुपये वसूल लिए गए। इतना ही नहीं, इलाज में लापरवाही से पति की मौत हो गई। महिला ने मंडलायुक्त, डीएम समेत तमाम अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं। सीएमओ स्तर पर जांच चल रही है और कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है, लेकिन पीड़िता का कहना है कि एक रुपया भी वापस नहीं मिला।
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Published on:
27 Dec 2025 10:05 pm
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