
देव प्राइमस हॉस्पिटल बरेली
बरेली। पीलीभीत बाईपास स्थित देव प्राइमस अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार अस्पताल के भीतर से ही भ्रष्टाचार और वसूली के आरोप उठे हैं। अस्पताल के निदेशक डॉ. मनीष गोयल ने कमिश्नर कार्यालय में शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि आयुष्मान योजना के मरीजों से इलाज और जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, एंबुलेंस के जरिए गंभीर मरीजों को लाकर आईसीयू में भर्ती कराने और फिर परिजनों से बड़ी रकम ऐंठने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी।
देव प्राइमस अस्पताल के निदेशक डॉ. मनीष गोयल ने अस्पताल प्रबंधन और कुछ चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि आयुष्मान योजना के तहत जिन मरीजों का इलाज पूरी तरह मुफ्त होना चाहिए, उनसे भी नकद रकम वसूली जा रही है। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती और इलाज की प्रक्रिया को कमाई का जरिया बना दिया गया है। शिकायत पत्र में दो डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि आयुष्मान कार्डधारकों को योजना का लाभ देने के बजाय उनसे अलग-अलग मदों में पैसा जमा कराया जाता है। मामले ने तूल पकड़ा तो स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सड़क हादसों या गंभीर हालत वाले मरीजों को एंबुलेंस के जरिए सीधे अस्पताल लाया जाता है। इसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कर परिजनों पर मोटा बिल थोप दिया जाता है। जबकि आयुष्मान योजना के तहत ऐसे मरीजों का इलाज निःशुल्क होना चाहिए। आरोपों के मुताबिक कई मामलों में मरीजों के परिजनों को यह तक नहीं बताया गया कि इलाज आयुष्मान योजना के तहत कवर हो सकता है। इससे अस्पताल पर सरकारी योजना को कमाई का जरिया बनाने के आरोप और गहरे हो गए हैं।
इसी बीच अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा भी फूट पड़ा। पीलीभीत जिले के बरखेड़ा क्षेत्र के सेमारिया ताराचंद निवासी वीरेश कुमार सड़क हादसे में घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। परिजनों का आरोप है कि मरीज का आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने 41 हजार रुपये का बिल थमा दिया। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और वसूली के आरोप लगाए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिवार को शांत कराया और जांच का आश्वासन दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच समिति में एसीएमओ डॉ. राकेश, डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित कुमार और एमओ डॉ. रजनीकांत को शामिल किया गया है। समिति अस्पताल के रिकॉर्ड खंगालेगी और आयुष्मान योजना के तहत इलाज करा चुके मरीजों और उनके परिजनों के बयान भी दर्ज करेगी। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने साफ कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो अस्पताल का आयुष्मान पैनल निरस्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो देव प्राइमस अस्पताल की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
Updated on:
21 May 2026, 11:47 AM IST
Published on:
21 May 2026, 11:44 AM IST
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