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लू के थपेड़ों से तड़प रहे गोवंश, बरेली की गोशालाओं में शुरू हुआ देसी कूलिंग सिस्टम, भीगे जूट के बोरों से बचाई जा रही जान

Bareilly आसमान से बरस रही आग ने इंसानों के साथ बेजुबान पशुओं की भी हालत खराब कर दी है। जिले की गोशालाओं में संरक्षित हजारों गोवंश भीषण गर्मी और लू से बचाने के लिए अब देसी जुगाड़ का सहारा लिया जा रहा है।

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गोशाला का निरीक्षण करते नोडल अधिकारी

बरेली। आसमान से बरस रही आग ने इंसानों के साथ बेजुबान पशुओं की भी हालत खराब कर दी है। जिले की गोशालाओं में संरक्षित हजारों गोवंश भीषण गर्मी और लू से बचाने के लिए अब देसी जुगाड़ का सहारा लिया जा रहा है। गर्म हवाओं को रोकने के लिए गोशालाओं में जूट के बोरे टांगे जा रहे हैं और उन पर लगातार पानी डलवाया जा रहा है, ताकि अंदर का तापमान कम रखा जा सके।

पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले की 102 गोशालाओं में करीब 12,700 गोवंश संरक्षित हैं। इसके अलावा नगर निकाय भी अलग से गोशालाएं संचालित कर रहे हैं। मगर इसके बावजूद शहर से लेकर गांव तक सड़कों, खेतों और बाजारों में बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश घूमते दिखाई दे रहे हैं। किसान संगठन लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और गोवंश संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े करते आए हैं।

लू रोकने के लिए लगाया गया ‘गीला पर्दा’

तेज गर्म हवाओं से गोवंश को राहत देने के लिए गोशालाओं में जूट के बोरों का इस्तेमाल शुरू किया गया है। जिस दिशा से लू चल रही है, वहां बोरे बांधे जा रहे हैं और उन पर समय-समय पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इससे गर्म हवा सीधे अंदर नहीं पहुंच पा रही और गोवंश को कुछ राहत मिल रही है। कई गोशालाओं में टैंकरों से अतिरिक्त पानी की व्यवस्था भी कराई गई है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सभी नोडल अधिकारियों को गोशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। साफ कहा गया है कि कहीं भी पानी, चारा या छाया की कमी नहीं मिलनी चाहिए। अधिकारियों को मौके पर जाकर यह देखने के लिए कहा गया है कि गोवंश को गर्मी से बचाने के इंतजाम वास्तव में हो भी रहे हैं या सिर्फ कागजों में दिखाए जा रहे हैं।

दो बड़ी गोशालाओं का प्रस्ताव, मगर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल

पशुपालन विभाग का दावा है कि जिले में दो बड़ी गोशालाओं के लिए प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं। हालांकि, जमीन पर हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बड़ी संख्या में गोवंश खुले में घूम रहा है और भीषण गर्मी में पानी व चारे के लिए भटकता दिखाई दे रहा है। ऐसे में विभागीय दावों और हकीकत के बीच का फर्क साफ नजर आ रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. मनमोहन पांडेय ने बताया कि गोशालाओं में संरक्षित गोवंश को गर्मी और लू से बचाने के लिए जूट के बोरों का उपयोग कराया जा रहा है। केयर टेकरों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि गोशाला में स्वच्छ पानी और चारे की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।