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बरेली में 93 साल पुरानी केसर चीनी मिल की जमीन नीलाम: गन्ना किसानों में जगी बकाया पैसे के भुगतान की उम्मीद, क्या है पूरा मामला?

बरेली में कई वर्षों से गन्ने का भुगतान पाने की राह देख रहे हजारों किसानों के लिए राहत भरी खबर है। शनिवार को बरेली की बहेड़ी तहसील सभागार में कुर्क की गई केसर चीनी मिल की जमीन की नीलामी में 28.05 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगी है।
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बरेली

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Avanish Pandey

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Updated: 30 May 2026, 10:08 PM IST

Kesar Sugar Mill Land auctioned

बरेली में केसर चीनी मिल की जमीन नीलाम (फोटो-पत्रिका)

Bareilly news: कई वर्षों से गन्ने का भुगतान पाने की राह देख रहे हजारों किसानों के लिए राहत भरी खबर है। शनिवार को बरेली की तहसील बहेड़ी सभागार में कुर्क की गई केसर चीनी मिल की जमीन की नीलामी में 28.05 करोड़ रुपए की सबसे ऊंची बोली लगी। नीलामी पूरी होते ही किसानों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि अब शायद उनके बकाया भुगतान का इंतजार खत्म हो सकेगा।

बहेड़ी की पहचान रही केसर चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1933 में हुई थी। चीनी मिल बंद होने के बाद से किसानों का करोड़ों रुपए का गन्ना मूल्य फंसा हुआ है। भुगतान न मिलने से कई किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में शनिवार को तहसील बहेड़ी सभागार में हुई नीलामी पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी थीं। सुबह से ही किसान और किसान संगठनों के प्रतिनिधि नीलामी की जानकारी लेने के लिए जुटने लगे थे।

बोली में दिखी प्रतिस्पर्धा

नीलामी में कई पक्षों ने हिस्सा लिया और खुलकर बोली लगाई। बोली बढ़ने के साथ सभागार में मौजूद लोगों की उत्सुकता भी बढ़ती रही। आखिरकार 28.05 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची बोली पर जमीन की नीलामी तय हुई। बोली पूरी होने के बाद किसानों के चेहरों पर संतोष नजर आया, क्योंकि उन्हें बकाया भुगतान मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है। नीलामी प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का विवाद न हो, इसके लिए पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी कराई गई। सभागार में सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी गई। नीलामी के हर चरण को रिकॉर्ड किया गया ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद खड़ा न हो।

अफसरों की मौजूदगी में पूरी हुई प्रक्रिया

नीलामी के दौरान राजस्व, गन्ना और पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया को खुले मंच पर संपन्न कराया गया, जिससे सभी प्रतिभागी बोली की कार्यवाही देख सकें। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी नीलामी प्रक्रिया पर नजर बनाए रखी। नीलामी पूरी होने के बाद किसानों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि वर्षों से फंसा गन्ना मूल्य मिलने से आर्थिक परेशानियां काफी हद तक कम हो सकेंगी। बहेड़ी और आसपास के गांवों के हजारों किसान अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि नीलामी की राशि से उनके बकाया भुगतान की प्रक्रिया कब शुरू होती है।

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