
बरेली। 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुए हिंसक बवाल और पुलिस पर फायरिंग के मामले में जांच कर रही पुलिस टीमों के दबाव का बड़ा असर सामने आया है। बवाल के दौरान दंगाइयों को अवैध हथियार सप्लाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सरगना और हिस्ट्रीशीटर इशरत अली ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस की जांच में उसके तार आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा के करीबी माने जाने वाले लोगों से जुड़ने की बात सामने आई है। इससे पूरे बवाल के पीछे एक संगठित साजिश की आशंका और गहरी हो गई है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि हिस्ट्रीशीटर इशरत अली, मौलाना तौकीर रजा के बेहद करीबी माने जाने वाले फरहत अली का सगा भाई है। फरहत अली वही व्यक्ति है जिसने बवाल के बाद मौलाना को अपने घर फाइक इंक्लेव में शरण दी थी। इतना ही नहीं, वह मौलाना के साथ पहले भी जेल जा चुका है। पुलिस को शक है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए बवाल के दौरान दंगाइयों तक अवैध हथियार पहुंचाए गए थे। जांच एजेंसियां अब इस कनेक्शन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
कुछ दिन पहले बहेड़ी पुलिस ने अवैध हथियारों के दो सप्लायर तस्लीम और सोमू खान उर्फ औशाफ को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से विदेशी पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए थे। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि उनके गैंग का असली सरगना इशरत अली है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि 26 सितंबर 2025 को हुए बरेली बवाल के लिए हथियारों की बड़ी खेप इशरत अली ने ही भेजी थी, जिसकी डिलीवरी झुमका चौराहे के पास कराई गई थी। इस खुलासे के बाद पुलिस ने इशरत अली की तलाश तेज कर दी थी।
इशरत अली के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, गोकशी समेत नौ गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। बवाल में हथियार सप्लाई के सबूत मिलने के बाद पुलिस उस पर भारी इनाम घोषित करने की तैयारी कर रही थी। लेकिन चालाक अपराधी इशरत अली ने पुलिस की घेराबंदी को भांप लिया। उसने हाफिजगंज के एक पुराने मुकदमे में अपनी जमानत तुड़वा दी और चुपचाप कोर्ट में पेश होकर जेल चला गया। इस तरीके से उसने संभावित पुलिस एनकाउंटर और तत्काल गिरफ्तारी से खुद को बचा लिया।
सीओ बहेड़ी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इशरत अली की गिरफ्तारी हथियार सप्लाई के मामले में बेहद अहम है। पुलिस जल्द ही उसे कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी। रिमांड के दौरान उससे यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बरेली बवाल के लिए हथियार खरीदने की फंडिंग किसने की थी और शहर में किन-किन लोगों को अवैध हथियार बांटे गए थे।
पुलिस को शक है कि इस पूरे अवैध हथियार सिंडिकेट में उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर (किच्छा) के कुछ सफेदपोश लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां इस एंगल को भी खंगाल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इशरत अली से पूछताछ के बाद बरेली बवाल के पीछे छिपे कई और चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है।
Published on:
09 Mar 2026 03:57 pm
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