
हाईकोर्ट ने 27 मार्च तक की दी थी मोहलत, मौलाना की मेडिकल रिपोर्ट से नहीं मिली राहत
एडीजे प्रथम कोर्ट ने आईएमसी के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान को दो मार्च 2010 को बरेली में हुए दंगे का मुख्य मास्टरमाइंड माना था। एडीजे रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने मौलाना को समन जारी किया। मौलाना नहीं आए तो उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। मौलाना ने एडीजे कोर्ट से बचने के लिए दंगों के सह आरोपी अपने साथी के जरिए जिला जज की अदालत में केस ट्रांसफर की अर्जी दी थी। जिस पर सुनवाई कर जिला जज ने केस अपनी अदालत में ट्रांसफर कर लिया था। अब जिला जज ही पूरे मामले की सुनवाई कर रहे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए मौलाना तौकीर हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने उन्हें 27 मार्च तक ट्रायल कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था। इसी दौरान मौलाना बीमार हो गए। उनके सीने में दर्द उठा। वह पहले बरेली के खुशलोक अस्पताल और बाद में दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती हो गए। उन्होंने अपने अधिवक्ता के जरिए कोर्ट ने प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया। इसके बाद मौलाना को एक अप्रैल को हाजिर होने का आदेश दिया था। इस आदेश के बावजूद मौलाना जिला जज की कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। जिस पर कोर्ट ने मौलाना को सीआरपीसी की धारा 82 के तहत भगोड़ा घोषित कर दिया है।
धारा 82 के बाद 83 और हो जाएगी मौलाना की संपत्ति की कुर्की
कोर्ट को यह विश्वास हो गया है कि मौलाना तौकीर रजा खां। जिसके विरूद्ध पहले ही गैर जमानती वारण्ट जारी किया गया था। वह फरार हो गया है या अपने को छिपा रहा है। जिससे उस वारण्ट का निष्पादन नहीं हो पा रहा है। इस वजह से न्यायालय ने उद्घोषणा जारी की है। उद्घोषणा लिखित जारी की गई है और उसका प्रकाशन भी कराया जाएगा। इसके बावजूद मौलाना की गिरफ्तारी या वह कोर्ट में हाजिर नहीं होते हैं तो सीआरपीसी की धारा 83 के तहत उनकी चल अचल संपत्ति की कुर्की की जाएगी। उनके दरवाजे पर ढोल पीटकर मौलाना तौकीर रजा खां के फरार होने की मुनादी कराई जाएगी। मौलाना को भगोड़ा घोषित करने के साथ ही जिला जज की कोर्ट ने 2010 के दंगे में उसके पांच गुर्गों के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया है।
Updated on:
01 Apr 2024 07:26 pm
Published on:
01 Apr 2024 07:08 pm
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