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बरेली।कभी बिथरी चैनपुर और गंगापार इलाके में जिसका नाम सुनते ही लोग दरवाजे बंद कर लेते थे, उस तश्वीर गैंग पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया। करीब 14 साल तक चली अदालती लड़ाई के बाद गैंगस्टर एक्ट कोर्ट ने गैंग लीडर तश्वीर और उसके साथी आरिफ को दोषी मानते हुए दो-दो साल की सजा सुना दी। अदालत ने दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
साल 2011 के दौर में बिथरी चैनपुर और आसपास के गांवों में तश्वीर गैंग का ऐसा खौफ था कि लोग इनके खिलाफ मुंह खोलने से भी डरते थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गिरोह लूट, चोरी और दबंगई की कई वारदातों में शामिल रहा। ग्रामीणों में डर इतना था कि कोई भी खुलकर गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गंगापार निवासी तश्वीर इस गिरोह का सरगना था। उसके साथ आरिफ और कल्लू मिलकर इलाके में अपराध की घटनाओं को अंजाम देते थे। आरोप है कि अपराध से जुटाए गए पैसों से गिरोह अपना नेटवर्क और दबदबा बढ़ा रहा था। सरकारी वकील दिगंबर पटेल ने अदालत में कई गवाह और साक्ष्य पेश किए, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।
अपर सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट संतोष कुमार यादव की अदालत ने तश्वीर और आरिफ निवासी गंगापार थाना विशारतगंज को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोनों को दो-दो साल के साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। गिरोह का तीसरा सदस्य कल्लू निवासी बाकरगंज थाना किला अभी तक पुलिस पकड़ से बाहर है। अदालत ने उसके खिलाफ अलग से सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
Published on:
15 May 2026 03:52 pm
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