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कैराना-नूरपुर की हार ने भाजपा को दिखाया आइना, इस सीट पर सपा और मजबूत हुई…

सपा और बसपा के गठबंधन के बाद उत्तर प्रदेश के समीकरण बदल गए हैं। बदायूं सीट पर कब्जे के लिए भाजपा को दोहरी लड़ाई लड़नी होगी।

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akhilesh modi

akhilesh modi

बरेली। प्रदेश में महागठबंधन का कमाल देखने को मिल रहा है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा के उपचुनाव गोरखपुर, फूलपुर, नूरपुर और कैराना में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। प्रदेश में बने इस नए सियासी समीकरण ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। अगर बात करें बदायूं लोकसभा सीट की तो इस सीट पर लगातार दो बार से समाजवादी पार्टी का ही कब्जा है। यहां सपा से धर्मेंद्र यादव सांसद हैं। इस सीट पर कब्जे का सपना देख रही भारतीय जनता पार्टी की राह गठबंधन के बाद और मुश्किल हो गई है। भाजपा को यहां पर जीत दर्ज करने के लिए गठबंधन के अलावा सांसद धर्मेंद्र के विकास कार्यों से भी लड़ना होगा।

लगातार दो बार जीते धर्मेंद्र
बदायूं के सांसद यहां पर लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके है। धर्मेंद्र यादव ने यहां पहली बार 2009 में बसपा के डीपी यादव को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया था जिसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश में चली मोदी लहर के बाद भी सांसद धर्मेंद्र ने इस सीट पर जीत हासिल की। धर्मेंद्र यादव को 498378 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नम्बर पर रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के बागीश पाठक को 332031 वोट प्राप्त हुए।

1991 से नही जीती भाजपा
बदायूं लोकसभा सीट पर भाजपा ने अंतिम बार 1991 में जीत हासिल की थी। तब स्वामी चिन्मयानन्द यहां से सांसद बने थे। इसके बाद हुए चुनाव में 1996, 1998, 1999 और 2004 में यहां से कांग्रेस के सलीम शेरवानी ने जीत हासिल की उसके बाद 2009 और 2014 में धर्मेंद्र यादव यहां से सांसद बने।

धर्मेंद्र से घबराए भाजपाई
बदायूं लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए भाजपा भी कशमकश में है। जिले में भाजपा के विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बदायूं में सांसद धर्मेंद्र यादव की तरह ही विकास कार्य कराने की मांग की है।

यादव-मुस्लिम गठजोड़ की काट मुश्किल
बदायूं में यादव, दलित और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। अब प्रदेश में बने नए सियासी समीकरण ने जहां सपा की राह आसान कर दी है, वही भारतीय जनता पार्टी की डगर कठिन हो गई है।