
brahm swaroop sagar
बरेली। जिले में बसपा का खास चेहरा माने जाने वाले पूर्व जोन कॉर्डिनेटर ब्रह्मस्वरूप सागर अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में बसपा से बगावत कर आए नेताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। ब्रह्मस्वरूप सागर के साथ ही बरेली मंडल के बसपा नेता रहे पूर्व विधायक अरशद खान, अनीस अहमद खान, हरिराम गौतम, खालिद खान ,हाफिज नूर अहमद, अली अब्बास, विपिन शर्मा, विशाल गौतम, नादिर रईस खान और जितेंद्र कुमार भी कांग्रेस में शामिल हो गए।
बसपा का चेहरा थे सागर
ब्रह्मस्वरूप सागर जिले मंडल में बहुजन समाज पार्टी का चेहरा रह चुके हैं। सागर के नसीमुद्दीन सिद्दीकी से भी अच्छे संबंध हैं जिसके कारण वो नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। ब्रह्मस्वरूप सागर समाजवादी पार्टी छोड़ कर बसपा में आए थे और उनकी मेहनत को देखते हुए बसपा ने उन्हें जोन कॉर्डीनेटर से जैसे महत्त्वपूर्ण पद पर भी बैठाया। बहुजन समाज पार्टी की सरकार में ब्रह्मस्वरूप सागर की जिले में तूती बोलती थी। बाद में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का मायावती से विवाद होने पर ब्रह्मस्वरूप सागर भी पार्टी में अलग थलग पड़ गए। उन्होंने बसपा से इस्तीफा दे दिया था। शुक्रवार को सागर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। ब्रह्मस्वरूप सागर व अन्य मुस्लिम चेहरों के कांग्रेस में जाने से जिले में जनाधार खो चुकी कांग्रेस को नई संजीवनी मिलने की संभावना है।
सुलतान बेग ने भी दिया बसपा को झटका
ब्रह्मस्वरूप के साथ ही सुलतान बेग ने भी बहुजन समाज पार्टी को झटका दिया है। सुलतान बेग ने भी बसपा छोड़ कर सपा का दामन थाम लिया है। सुलतान बेग जिले के कद्दावर मुस्लिम नेता माने जाते हैं। वो तीन बार विधायक रह चुके हैं। सुलतान बेग और ब्रह्मस्वरूप सागर के बसपा छोड़ने के कारण बसपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को इसका फायदा मिलता दिख रहा है।
मंडल में बसपा शून्य
2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते जहां समाजवादी पार्टी का मजबूत किला ढह गया तो बसपा मण्डल में पूरी तरह से साफ़ हो गयी। समाजवादी पार्टी को महज दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा तो बसपा को मण्डल में एक भी सीट नसीब नहीं हुई। 2012 के चुनाव में बसपा ने मण्डल में छह सीटें जीती थीं। 2012 के चुनाव में बसपा ने मण्डल की 25 विधानसभा सीट में से बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर में दो दो सीट जीती थीं जिसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा मण्डल की पांच लोकसभा सीट में से एक भी नहीं जीत पाई और 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बसपा अपनी एक भी सीट नहीं बचा पाई और मण्डल की सभी सीटों पर बसपा को हार का सामना करना पड़ा। बरेली शहर और कैंट में तो बसपा प्रत्याशियों की जमानत भी जब्त हो गयी। आंवला , फरीदपुर ,भोजीपुरा, बिथरी चैनपुर में बसपा मुख्य मुकाबले में भी नहीं रही और तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। जबकि नवाबगंज में बसपा चौथे स्थान पर रही सिर्फ मीरगंज और बहेड़ी में बसपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे।
Updated on:
23 Feb 2018 02:34 pm
Published on:
23 Feb 2018 02:31 pm
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