
बरेली प्रशासन में उस वक्त बड़ी हलचल मच गई, जब सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। 2019 बैच के तेज-तर्रार पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने यह इस्तीफ़ा जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ई-मेल के माध्यम से भेजा है। इस्तीफे की वजह सरकार की नीतियों और विशेष रूप से यूजीसी के नए नियमों को लेकर गहरी असहमति बताई जा रही है।
कानपुर नगर निवासी अलंकार अग्निहोत्री इससे पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिलों में एसडीएम के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासनिक क्षेत्र में स्पष्टवादिता और सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले अधिकारी का यह कदम प्रदेश की नौकरशाही में गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस्तीफ़े में अलंकार अग्निहोत्री ने तीखे शब्दों में कहा है कि जब सरकारें समाज और देश को बाँटने वाली नीतियाँ अपनाने लगें, तो उन्हें जगाना ज़रूरी हो जाता है। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए कहा कि यह कॉलेजों के शैक्षणिक माहौल को ज़हरीला बना रहा है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, यूजीसी नियमों के अलावा हालिया दिनों में शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ हुई मारपीट की घटना ने भी विवाद को और भड़का दिया। इस प्रकरण के बाद प्रशासनिक दबावों और वैचारिक टकराव की चर्चाएं तेज़ हो गई थीं।
गलियारों में तेज़ हलचल, आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक सरकार या शासन स्तर पर इस्तीफ़े को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बरेली से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर हलचल तेज़ है।
इसे केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ नौकरशाही के भीतर उभरती असहमति के रूप में भी देखा जा रहा है। अलंकार अग्निहोत्री का यह इस्तीफ़ा न सिर्फ बरेली बल्कि पूरे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में दूरगामी सियासी और वैचारिक बहस को जन्म दे सकता है।
Updated on:
26 Jan 2026 06:12 pm
Published on:
26 Jan 2026 02:34 pm
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