
बरेली। एडीएम कंपाउंड स्थित सिटी मजिस्ट्रेट आवास एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पहले यही आवास निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे और सरकार विरोधी तेवरों के कारण सुर्खियों में आया था, और अब उसी आवास पर बिजली विभाग ने 22 लाख रुपये से अधिक की आरसी (वसूली प्रमाणपत्र) काटकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
रामपुर गार्डन स्थित कामर्शियल-2 वर्टिकल कार्यालय से अधिशासी अभियंता की ओर से आरसी जारी होते ही कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया। फाइल पहुंची तो सवाल उठे—क्या वाकई सिटी मजिस्ट्रेट आवास का इतना बड़ा बिजली बिल बकाया था
बिजली विभाग ने सिटी मजिस्ट्रेट राजस्व (आवास) के नाम 22 लाख 73 हजार 932 रुपये का मांगपत्र जारी कर दिया। यह आरसी एडीएम एफआर कार्यालय को वसूली के लिए भेजी गई। करीब दस दिन पहले जब यह फाइल कलेक्ट्रेट पहुंची, तब से अंदरखाने चर्चा का बाजार गर्म है। खुले मंच पर कोई कुछ नहीं बोल रहा, लेकिन गलियारों में चर्चा है कि क्या इतने सालों से बिल जमा नहीं हुआ।
यही वह सरकारी आवास है, जहां से 26 जनवरी को तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देते हुए यूजीसी और प्रयागराज में बटुकों के कथित अपमान के खिलाफ आवाज उठाई थी। इस्तीफे और बयानबाजी के बाद यह आवास पहले ही राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा में था।
अब उसी पते पर 22 लाख की आरसी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मामला जैसे ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचा, सख्त नाराजगी जताई गई। आरसी की फाइल को सार्वजनिक चर्चा से बचाने की कोशिशें भी हुईं।
प्रशासन की आपत्ति के बाद बिजली विभाग ने यू-टर्न लिया। 18 फरवरी को अधिशासी अभियंता सूर्य कुमार ने एडीएम एफआर को पत्र लिखकर आरसी बिना वसूली के वापस करने का अनुरोध किया।
करीब दस दिन से यह मामला कलेक्ट्रेट और तहसील सदर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारी खुलकर कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन अंदरूनी हलचल साफ दिख रही है। बरेली का सिटी मजिस्ट्रेट आवास जो कभी इस्तीफे की गूंज से सुर्खियों में था—अब 22 लाख की बिजली आरसी के कारण नई बहस छेड़ चुका है। सवाल यही है कि क्या यह महज तकनीकी गलती थी या किसी बड़ी लापरवाही की परत अभी खुलनी बाकी है।
Updated on:
22 Feb 2026 02:01 pm
Published on:
22 Feb 2026 02:00 pm
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