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सीएम योगी के आदेश से खलबली, बरेली-पीलीभीत सीमा विवाद में तीन गांवों की 67.53 हेक्टेयर भूमि के भू-चित्रों में ओवरलैपिंग

बरेली और पीलीभीत जिलों की सीमा पर स्थित तीन गांवों — शेखापुर, गुलड़हाई और पर्वतपुर पट्टी — की भूमि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इन गांवों के भू-चित्रों में 67.53 हेक्टेयर ज़मीन की ओवरलैपिंग पाई गई है, जिसे आधार बनाकर चकबंदी की प्रक्रिया पहले ही निरस्त कर दी गई थी।

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बरेली/पीलीभीत। बरेली और पीलीभीत जिलों की सीमा पर स्थित तीन गांवों — शेखापुर, गुलड़हाई और पर्वतपुर पट्टी — की भूमि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इन गांवों के भू-चित्रों में 67.53 हेक्टेयर ज़मीन की ओवरलैपिंग पाई गई है, जिसे आधार बनाकर चकबंदी की प्रक्रिया पहले ही निरस्त कर दी गई थी। ग्रामीणों ने इस निर्णय को गलत ठहराते हुए चकबंदी अधिकारियों पर गुमराह करने वाली रिपोर्ट भेजने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई शिकायत के बाद अब मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

विधायक प्रवक्तानंद ने उठाया मुद्दा, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

बरखेड़ा के विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने ग्रामीणों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एक निष्पक्ष जांच समिति के गठन की मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश मिलने के बाद मुरादाबाद मंडल की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने दोनों जिलों की प्रशासनिक टीमों को जांच में लगाया।

संयुक्त जांच समिति का गठन, तीन दिन में रिपोर्ट तलब

कमिश्नर सौम्या अग्रवाल के निर्देश पर छह अधिकारियों की एक संयुक्त जांच टीम गठित की गई है, जिसमें बरेली व पीलीभीत के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। समिति को आदेश दिया गया है कि वह स्थलीय और दस्तावेज़ी जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस टीम में बरेली की अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), उप जिलाधिकारी नवाबगंज, जिला चकबंदी अधिकारी, वहीं पीलीभीत के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), बीसलपुर के उप जिलाधिकारी और चकबंदी अधिकारी को शामिल किया गया है।

चकबंदी की प्रक्रिया पर उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2015 में चकबंदी की प्रक्रिया की अधिसूचना जारी हुई थी, लेकिन मार्च 2023 में पीलीभीत के चकबंदी उप संचालक द्वारा चकबंदी आयुक्त को भेजी गई रिपोर्ट में इन गांवों की ज़मीन को लेकर ओवरलैपिंग दिखाई गई। इसके बाद 21 मार्च 2023 को इन गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर करने की सिफारिश की गई, और शासन ने अधिसूचना को निरस्त कर दिया।

ग्रामीणों की समस्याएँ — खेत छोटे, बिखरे और अलाभकारी

शिकायत में ग्रामीणों ने बताया कि चकबंदी रुकने की वजह से उनकी ज़मीनें पीढ़ी दर पीढ़ी छोटे-छोटे हिस्सों में बंटती रहीं, जिससे खेतों का आकार बेहद छोटा हो गया। ये खेत कई स्थानों पर बिखरे हुए हैं, जिससे जुताई, बुवाई, सिंचाई और कटाई में काफी परेशानी होती है। इसके अलावा, छुट्टा पशुओं से बचाव के लिए तारबंदी तक संभव नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चकबंदी दोबारा कराई जाए और छोटे-छोटे खेतों को मिलाकर बड़े प्लॉट दिए जाएँ, तो उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है।

मांग: चकबंदी प्रक्रिया बहाल हो, दोषी अफसरों पर कार्रवाई हो

ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि चकबंदी प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाए और जिन्होंने जानबूझकर भ्रामक रिपोर्ट देकर इसे रुकवाया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि चकबंदी ही इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या का एकमात्र हल है।


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