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कमर्शियल एलपीजी संकट: बरेली में होटल-ढाबे बंद, कारोबार ठप, अंगीठी के सहारे चल रहा काम, चौराहों से बाजारों तक हर जगह सन्नाटा

शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत अब विकराल रूप ले चुकी है। शहर का होटल और फास्ट फूड कारोबार बुरी तरह चरमरा गया है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर ताले लटक गए हैं, जबकि जो दुकानें खुली हैं, वे भी किसी तरह जुगाड़ के सहारे चल रही हैं।

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भट्टी पर बनता खाना व रेस्टोरेंट के मालिक नरेश कश्यप

बरेली। शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत अब विकराल रूप ले चुकी है। शहर का होटल और फास्ट फूड कारोबार बुरी तरह चरमरा गया है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर ताले लटक गए हैं, जबकि जो दुकानें खुली हैं, वे भी किसी तरह जुगाड़ के सहारे चल रही हैं। गैस न मिलने से रसोई ठंडी पड़ गई है और कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

नोवेल्टी चौराहा, प्रेमनगर और मॉडल टाउन जैसे व्यस्त इलाकों में आम दिनों की चहल-पहल गायब है। कई नामी चाट और फास्ट फूड की दुकानें बंद पड़ी हैं। राम मनोहर आलू चाट, तलवार चाट भंडार, शमा रेस्टोरेंट और राम भरोसे चाट जैसे प्रतिष्ठान भी गैस की कमी के चलते बंद बताए जा रहे हैं। जहां पहले ग्राहकों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है।

लकड़ी की भट्टी भी नहीं बचा पा रही कारोबार

सत्कार रेस्टोरेंट के मालिक नरेश कश्यप ने बताया कि कमर्शियल सिलेंडर न मिलने की वजह से उन्हें अब लकड़ी की भट्टी पर काम करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भी वह ग्राहकों को समय पर खाना नहीं दे पा रहे हैं। उनका कहना है कि गैस की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो रेस्टोरेंट पूरी तरह बंद करना पड़ेगा।

अंगीठी पर लौटे दुकानदार, फिर भी काम अधूरा

गैस की किल्लत ने दुकानदारों को वर्षों पीछे धकेल दिया है। कई फास्ट फूड विक्रेता मजबूरी में अंगीठी और कोयले का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इससे न तो काम की गति बन पा रही है और न ही ग्राहकों की मांग पूरी हो रही है। धुएं और धीमी आंच के बीच खाना बनाना मुश्किल हो रहा है, जिससे ग्राहक भी वापस लौट रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस तरह दुकान चलाना घाटे का सौदा बनता जा रहा है। शहर में सैकड़ों फास्ट फूड और छोटे होटल संचालकों ने दुकानें बंद कर दी हैं। जो लोग रोज कमाकर खाने वाले हैं, उनके सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही गैस की सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो हालात और बिगड़ेंगे और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

एजेंसियों पर कालाबाजारी के आरोप, प्रशासन कटघरे में

गैस एजेंसी संचालकों पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है और सिलेंडर परिचितों के जरिए ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। इसको लेकर कारोबारियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो हालात और विस्फोटक हो सकते हैं। लगातार बढ़ रही इस किल्लत ने बरेली के खाद्य व्यवसाय को डूबने की कगार पर ला खड़ा किया है। होटल और ढाबा संचालकों का साफ कहना है कि अगर जल्द ही गैस की सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो वे स्थायी रूप से दुकान बंद करने को मजबूर हो जाएंगे। अब नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है, लेकिन तब तक शहर का स्वाद और कारोबार दोनों ठंडे पड़े हैं।

आपूर्ति ठप, जवाब वही- इंतजार कीजिए

जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह का कहना है कि अभी तक कमर्शियल सिलेंडर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो सकी है और स्थिति सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, राहत नहीं।