
बरेली। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची सरकारी टीम पर माफिया ने खुला हमला बोल दिया। जिला खनन अधिकारी की गाड़ी में टक्कर मार दी गई, कर्मचारियों पर पथराव हुआ और दबंगई दिखाते हुए पकड़े गए वाहन छुड़ाने की कोशिश की गई। सवाल उठ रहा है—क्या कानून से ऊपर हो गए हैं ये खनन माफिया।
15 मार्च की रात करीब एक बजे जिला खनन अधिकारी मनीष कुमार अपनी टीम के साथ बुखारा मोड़ से बभिया की ओर चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान 15-20 ट्रैक्टर-ट्रॉली अवैध खनन करते पकड़ी गईं। टीम को देखते ही चालक वाहन लेकर भाग निकले, लेकिन पांच किलोमीटर तक पीछा कर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को दबोच लिया गया। 16 मार्च की रात दोबारा छापेमारी के दौरान हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि कृपाल सिंह और उसका साथी महेश ईको स्पोर्ट कार से मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए दबाव बनाने लगे। इसी दौरान उन्होंने सरकारी वाहन में टक्कर मार दी, जिससे एक कर्मचारी घायल हो गया। इसके बाद भी माफिया नहीं रुके और ट्रैक्टर-ट्रॉली को भगाने की कोशिश करते रहे।
जब पकड़े गए वाहनों को चौकी लाया जा रहा था, तभी गांव के पास कुछ लोगों ने टीम को घेरने की कोशिश की और पथराव शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर अफरातफरी मच गई। आरोपियों ने सड़क पर मिट्टी बिखेरकर टीम का पीछा भी रोकने की कोशिश की और फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम सदर प्रमोद कुमार, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। हालांकि तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। टीम ने बाद में कार्रवाई करते हुए दो लोडर और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को सीज कर बभिया चौकी पर खड़ा कराया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी कृपाल सिंह सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें दिखाकर दबाव बनाता था। इसी वजह से उसके खिलाफ कोई खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं करता था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इसी ‘प्रभाव’ के दम पर माफिया इतना बेलगाम हो गया। जिला खनन अधिकारी की तहरीर पर थाना कैट में कृपाल सिंह, महेश समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ केस दर्ज होने से खनन माफिया पर लगाम लगेगी या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
Updated on:
20 Mar 2026 02:43 pm
Published on:
20 Mar 2026 02:43 pm
