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54 साल बाद बरेली को मिले झुमके पर शुरू हुआ विवाद, बीजेपी विधायक ने खड़े किए सवाल

फरीदपुर से भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल ने भी झुमके पर सवाल खड़े किए हैं और उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिख कर कहा है कि बरेली की पहचान बताने के लिए झुमका ही मिला।

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54 साल बाद बरेली को मिले झुमके पर शुरू हुआ विवाद, बीजेपी विधायक ने खड़े किए सवाल

54 साल बाद बरेली को मिले झुमके पर शुरू हुआ विवाद, बीजेपी विधायक ने खड़े किए सवाल

बरेली। शहर को नई पहचान देने के लिए परसाखेड़ा के जीरो प्वाइंट पर लगाए गए विशालकाय झुमके को लेकर विवाद शुरू हो गया है। तमाम लोगों ने इस झुमके पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि फिल्म के एक गाने में झुमके का जिक्र है लेकिन झुमका बरेली की पहचान नहीं है। फरीदपुर से भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल ने भी झुमके पर सवाल खड़े किए हैं और उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिख कर कहा है कि बरेली की पहचान बताने के लिए झुमका ही मिला। बरेली के अहिच्छत्र से प्रप्त गंगा, यमुना अथवा कुबेर की मूर्तियों को बनवाया होता। भारतीय रिजर्व बैंक के गेट पर कुबेर की मूर्ति लगी है।

एनएच 24 पर लगा है झुमका
बरेली विकास प्राधिकरण ने परसाखेड़ा के जीरो प्वाइंट पर समाजसेवी डॉक्टर केशव अग्रवाल की मदद से विशालकाय झुमका लगवाया है। शनिवार को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने झुमके का लोकार्पण किया था। लोकार्पण के बाद से ही ये झुमका चर्चा में आ गया है और झुमके को लेकर सोशल मीडिया में चर्चा छिड़ी हुई है। तमाम लोग झुमके के पक्ष में और विरोध में पोस्ट कर रहे हैं। इन सबके बीच फरीदपुर से भाजपा विधायक ने भी झुमके को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है और झुमके को लेकर फेसबुक पर पोस्ट की है।

क्या लिखा बीजेपी विधायक ने

बरेली की पहचान बताने के लिये केवल झुमका ही मिला। सांस्कृतिक रुप से दीवलिया होने पर ऐसा ही होता है। काश हमने बरेली के अहिच्छत्र से प्रप्त गंगा, यमुना अथवा कुबेर की मूर्तियों को बनवाया होता। भारतीय रिजर्व बैंक के गेट पर कुबेर की मूर्ति लगी है और राष्ट्रीय संग्रहालय के गेट पर गंगा और यमुना। 1857 ईस्वी के स्वतंत्रता संग्राम में बरेली का महान योगदान था। बहादुर शाह जफर की सरकार के रिसालों और इस्तिहारों की बरेली में छपाई होती थी। किले पर पुराना पुल मुगलों के समय का है। शिव पार्वती और नाथ नगरी का नाम लेने पर हमें डर लगने लगता है।पुरानी इमारतों में से राजकीय इंटर कॉलेज की बिल्डिंग का अधिकतम भाग ध्वस्त हो चुका है। कैंट का रॉयल होटल खण्डहर हो चुका है।सुभाष नगर की भांतु जेल को भी तोडने की कोशिश की जा रही है। अब बरेली की बरफ़ी फिल्म बनाई गई है तो सभी परम विद्वान बरफ़ी चौराहा बनाने में लग जायेंगे। काश हमने कभी देश के धौलावीरा, हस्तिनापुर,कौशाम्बी,श्रावस्ती जैसे बरेली के अहिच्छ्त्र को विकसित कराने की बात की होती जहाँ देश का प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल भी है तो बरेली का नाम दुनिया में जाना जाता।


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