
कोर्ट ने बचाव पक्ष को कई मौके दिए
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छह माह में इस मुकदमे की कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया हुआ है। निदा खान की ओर से 13 सितंबर 2021 को अपनी गवाही दाखिल की गई थी। इसके बाद कई तारीखों पर बचाव पक्ष की ओर से निदा खान से जिरह की गई। समयाभाव के कारण जिरह पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने जिरह पूरी करने के लिए बचाव पक्ष को कई मौके दिए, लेकिन जिरह पूरी नहीं की गई।
अंतिम बहस के बाद सुनाया फैसला
न तो वह खुद आए और न ही कोई स्थगन प्रार्थनापत्र दिया गया। इसके बाद 19 अप्रैल 2023 को मोईन हसन की गवाही दाखिल की गई। इस गवाह से जिरह करने के लिए अदालत ने कई मौके दिए पर बचाव पक्ष की ओर से कोई हाजिर नहीं हुआ और न ही कोई स्थगन प्रार्थनापत्र दिया गया। कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष को साक्ष्य देने के लिए भी कई अवसर दिए गए, लेकिन कोई साक्ष्य न देने के कारण बचाव पक्ष का गवाही का मौका समाप्त करते हुए अंतिम बहस के बाद यह फैसला दिया गया। बचाव पक्ष का यह कहना सही नहीं है कि एकपक्षीय गवाही हुई है। कई मौके दिए जाने के बाद भी गवाहों से जिरह नहीं की गई।
Published on:
16 Feb 2024 11:59 am
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