
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली में कार्यरत रहे सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. शुकदेव नंदी साइबर ठगी का शिकार हो गए। पश्चिम बंगाल निवासी 65 वर्षीय डॉ. नंदी से ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए 5 दिन तक उन्हें "डिजिटल अरेस्ट" में रखा और ₹1.29 करोड़ रुपये ठग लिए। रकम मिलते ही साइबर ठगों ने उसे 75 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। ये सभी खाते केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में खोले गए थे।
साइबर अपराध शाखा की जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला हाईली प्लांड ट्रांजेक्शन नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें फर्जी नाम और दस्तावेजों से खोले गए खातों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन सभी बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और ठगी गई रकम का एक हिस्सा भी फ्रीज कराने में प्रारंभिक सफलता हासिल की है।
डॉ. नंदी को 16 जून को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी, बेंगलुरु यूनिट से बताया और आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड से फर्जी सिम कार्ड लिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ह्यूमन ट्रैफिकिंग और नौकरी के फर्जीवाड़े में हुआ है।
ठग ने डॉ. नंदी को विश्वास में लेते हुए कहा कि उन्हें जांच के दौरान डिजिटल निगरानी में रखा जाएगा और किसी से बातचीत नहीं करनी है।
16 से 20 जून तक उन्होंने डर के कारण ठगों के बताए बैंक खातों में 1.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जैसे ही मामला साइबर क्राइम थाना प्रभारी नीरज कुमार की टीम को मिला, तुरंत बैंक और मोबाइल ट्रांजेक्शन डिटेल खंगाले गए।
पता चला कि ठगों ने पैसे मिलते ही उसे 75 खातों में ट्रांसफर कर दिया, जिससे रकम को ट्रेस करना मुश्किल हो गया।
नीरज कुमार ने बताया,
“सभी संदिग्ध बैंक खाते केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थित हैं। हमनें इन सभी को फ्रीज करा दिया है और ट्रांजेक्शन चेन को जोड़ने का काम जारी है।”
पुलिस ने अब तक ठगी गई राशि के हिस्से को रिकवर कर लिया है।
शेष रकम की रिकवरी और साइबर ठगों की पहचान के लिए खातों की लेन-देन श्रृंखला खंगाली जा रही है।
जल्द ही एक विशेष टीम को दक्षिण भारत भेजने की तैयारी है, जहां अधिकतर बैंक खाते खोले गए थे।
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Published on:
29 Jun 2025 11:28 am
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