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देव प्राइमस अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, आयुष्मान मरीजों से वसूली के आरोपों की जांच तेज, रिकॉर्ड खंगालने पहुंची टीम

पीलीभीत बाईपास रोड स्थित देव प्राइमस अस्पताल पर आयुष्मान योजना के मरीजों से अवैध वसूली और आईसीयू के नाम पर मोटा बिल थोपने के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को बड़ा एक्शन लिया।
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बरेली

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Avanish Pandey

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Updated: 21 May 2026, 10:15 PM IST

Dev Primus Hospital Investigation Team

जांच करती टीम

बरेली। पीलीभीत बाईपास रोड स्थित देव प्राइमस अस्पताल पर आयुष्मान योजना के मरीजों से अवैध वसूली और आईसीयू के नाम पर मोटा बिल थोपने के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को बड़ा एक्शन लिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश पर गठित जांच समिति अस्पताल पहुंची और वहां भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर इलाज और भुगतान से जुड़े सवाल पूछे। जांच टीम ने आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले। मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

गुरुवार को सीएमओ के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने देव प्राइमस हॉस्पिटल का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत भर्ती 12 मरीज मिले। समिति ने मरीजों और उनके परिजनों से इलाज, जांच और भुगतान को लेकर बातचीत की। टीम ने यह जानने का प्रयास किया कि कहीं योजना के नाम पर उनसे कोई रकम तो नहीं वसूली गई।

रिकॉर्ड खंगाले, मांगे जरूरी दस्तावेज

जांच समिति ने अस्पताल प्रबंधन से आयुष्मान योजना के तहत भर्ती मरीजों के इलाज से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया। साथ ही कई जरूरी दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम भर्ती प्रक्रिया, बिलिंग रिकॉर्ड, जांच शुल्क और आईसीयू में भर्ती किए गए मरीजों की फाइलों की भी पड़ताल कर रही है। देव प्राइमस अस्पताल के निदेशक डॉ. मनीष गोयल ने कमिश्नर कार्यालय में शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि आयुष्मान योजना के मरीजों से इलाज और जांच के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि गंभीर मरीजों को एंबुलेंस से लाकर आईसीयू में भर्ती किया जाता है और फिर परिजनों से मोटी रकम ऐंठी जाती है। आरोपों में कुछ चिकित्सकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।

41 हजार के बिल पर फूटा था परिजनों का गुस्सा

मामला उस वक्त और गरमा गया था जब सड़क हादसे में घायल पीलीभीत निवासी वीरेश कुमार की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। परिवार का आरोप था कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने 41 हजार रुपये का बिल थमा दिया। सूचना पर पुलिस पहुंची थी और किसी तरह माहौल शांत कराया गया था। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि जांच समिति ने जांच शुरू कर दी है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजेगी। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आयुष्मान पैनल निरस्त करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

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