
बरेली। चार माह विश्राम के बाद भगवान विष्णु devutthana ekadashi को जागते है। भगवान विष्णु के शयनकाल के इन चार मासों में विवाह आदि मांगलिक शुभ कार्याें का आयोजन निषेध माना जाता है। हरि के जागने के बाद ही इस एकादशी से सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य शुरू किये जाते हैं। बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार इस दिन तुलसी पूजन का उत्सव, तुलसी से शालिग्राम के विवाह का आयोजन धूम-धाम से मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार तुलसी को लेकर कुछ महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
इन बातों का रखें ध्यान
तुलसी पत्र बिना स्नान किये नहीं तोड़ना चाहिए।इससे पूजन कार्य निष्फल हो जाता है।
वायु पुराण के अनुसार पूर्णिमा, अमवस्या, द्वादशी, रविवार व संक्रान्ति के दिन दोपहर दोनों संध्या कालों के बीच में तथा रात्रि में तुलसी नहीं तोड़ना चाहिए।
तेल मालिश किये हुये भी तुलसी ग्रहण न करें।
जन्म या मृत्यु के अशौच में, अपिवत्र समय में तुलसी पत्र ग्रहण नहीं करना चाहिए। क्योंकि तुलसी श्री हरि के स्वरूप वाली ही हैं।
धर्म पुराण के अनुसार तुलसी पत्र को पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भी नहीं तोड़ना चाहिए।
तुलसीदल कभी दांतों से नहीं चबाना चाहिए।
गणेश जी की पूजा में तुलसी पत्र चढ़ाना वर्जित है।
Updated on:
19 Nov 2018 03:37 pm
Published on:
19 Nov 2018 11:28 am
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