
बरेली। इज्जतनगर क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद मंगलवार तड़के पुलिस एनकाउंटर में मुख्य आरोपी अफसर उर्फ बौरा ढेर हो गया। इस पूरे घटनाक्रम ने जहां एक ओर पीड़ित परिवार को राहत दी, वहीं आरोपी के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल भी खड़े किए हैं। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही पत्नी सायमा के शब्द इस घटना की भयावहता को बयां करते हैं मेरा पति हैवान था… वह मुझे और बच्चों को मार डालता।
अस्पताल में भर्ती सायमा ने बताया कि उसका पति अफसर लंबे समय से उसे और बच्चों को जान से मारने की धमकियां देता था। वह कहता था कि पूरे परिवार को खत्म कर देगा। सायमा के मुताबिक, शादी के आठ साल बाद भी उसका व्यवहार नहीं बदला। वह हर दिन डर के साए में जी रही थी।
सायमा ने पुलिस कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि अब वह अपने बच्चों को बिना डर के पाल सकेगी।
सोमवार को गांव में पंचायत के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी। इसी दौरान अफसर ने गाली-गलौच शुरू कर दी। विरोध करने पर उसने सायमा के भाई आदिल पर चाकू से हमला कर दिया। बचाने आए सास आसमा को भी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। सायमा ने बताया कि हमला इतना अचानक था कि शुरू में समझ ही नहीं आया कि चाकू लग चुका है, लेकिन बाद में भारी रक्तस्राव से स्थिति स्पष्ट हुई।
घटना के बाद पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपी की तलाश में तीन टीमें लगा दीं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, लेकिन आरोपी रात तक हाथ नहीं आया। आधी रात सूचना मिली कि अफसर असलहा लेकर अस्पताल पहुंचकर पत्नी की हत्या की योजना बना रहा है। इसके बाद अस्पताल में सुरक्षा बढ़ा दी गई और इलाके में सघन चेकिंग शुरू हुई। मंगलवार सुबह करीब पांच बजे सहारा ग्राउंड के पास पुलिस ने उसे घेर लिया। चेतावनी के बावजूद आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही ढेर कर दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने करीब 10 राउंड फायर किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने सात राउंड फायरिंग की। ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। अफसर को चार गोलियां लगीं—एक सीने में, एक कंधे पर, एक सिर में और एक छूकर निकल गई। पोस्टमार्टम में उसके सिर से एक गोली बरामद हुई, जबकि बाकी गोलियां शरीर को पार कर गईं।
एनकाउंटर की खबर मिलते ही सायमा के परिवार और गांव में राहत की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि पुलिस ने सही कार्रवाई कर मृतकों को न्याय दिलाया। वहीं, आरोपी के भाई कौशर और बहन फरीन ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जाना चाहिए था। उनका कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और एनकाउंटर से पहले पूरी जांच होनी चाहिए थी। वहीं पोस्टमार्टम के बाद सास आसमा और साले आदिल को पहले सुपुर्द-ए-खाक किया गया। देर शाम आरोपी अफसर का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया।
Updated on:
18 Mar 2026 12:25 pm
Published on:
18 Mar 2026 12:24 pm
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