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बरेली

चाहें मुझे गर्दन अलग करवानी पड़े….. पर अमृत चख कर ही जाऊंगा, 32 प्राणियों ने किया अमृतपान, खालसा पंथ में हुए प्रवर्तित

रविवार को गुरुद्वारा श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी सिंह सभा जनकपुरी में 22 जून को मनाए गए सिक्खों के छटे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष में अमृत संचार का आयोजन किया गया।

बरेलीJun 23, 2024 / 08:56 pm

Avanish Pandey

बरेली। रविवार को गुरुद्वारा श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी सिंह सभा जनकपुरी में 22 जून को मनाए गए सिक्खों के छटे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष में अमृत संचार का आयोजन किया गया। जिसमें विशेष रूप से श्री अमृतसर साहिब से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से पंच प्यारों को भेजा कराया गया।
लाखों की भीड़ में से पांच लोग अपना शीश देने के लिए हुए थे तैयार
जैसा कि सभी जानते हैं सिक्खों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब ने 1699 में बैसाखी के दिन भरी सभा मे पांच शीशों की मांग की और लाखों की भीड़ में से पांच लोग अपना शीश देने के लिए तैयार हुए। जिनको बाद में अमृत चखाकर पंच प्यारों का दर्जा दिया गया। गुरु साहिब ने खुद भी पंच प्यारों से अमृत की दात मांगी और तभी से उनके नाम के आगे भी सिंह लगाया जाने लगा।
तभी से पंथ का असूल है कि अमृत चख कर खालसा पंथ में लिया जाता है प्रवेश
गुरु साहिब ने अमृत चखाकर खालसा फोर्स तैयार की थी। तभी से पंथ का असूल है कि अमृत चख कर खालसा पंथ में प्रवेश लिया जाता है। गुरु साहिब ने कहा “प्रथम रहत एह जान खण्डे की पहुल छके” जिसका भावार्थः है कि सबसे पहले नियम यह है कि अमृत चख कर गुरु वाले बनों। इसीलिए हर बड़े गुरु पर्व या धार्मिक कार्यक्रम का मुख्य निचोड़ होता है अमृत संचार जिसमें पंच प्यारे साहिबान प्राणियों यानी इंसानों को अमृत की दात देकर खालसा पंथ में जोड़ते हैं और प्राणी अमृत पान कर गुरु वाले बनते हैं।
दोनों बच्चों की इस गुरु के प्रति श्रद्धा व प्रेम को देखकर हर कोई रह गया दंग
इस अवसर पर बिजनोर, बदायूं, लखीमपुर खीरी सहित बरेली के 32 प्राणियों ने अमृत चख कर खालसा पंथ में प्रवेश लिया व गुरु वाले बने। इस दौरान दो 10 वर्षीय बच्चों ने कमाल कर दिया। एक गोला के पास एक गुरुद्वारे में ग्रन्थी साहिब के पद पर कार्यरत गुरमीत सिंह के 10 वर्षीय पुत्र प्रभजोत सिंह ने अमृत चखने की जिद्द पकड़ ली वह गुरुद्वारा में ही सेवा करने वाली अपनी बुआ सिमरन कौर के पास अपनी बहन के साथ गुरु पर्व पर आया हुआ था। दूसरा डेरी संचालक हरजीत सिंह काकू का 11 वर्षीय मनकीरत सिंह, बताया जा रहा है कि दोनों के माता-पिता ने डराया की पंच प्यारे पहले गर्दन काट देंगे। मगर दोनों ही बच्चे अपनी जिद्द पर अटल थे। वह बोले चाहें गर्दन काट दो पर अमृत तो चखना ही है। बता दें, बच्चों के परिजन इस लिए डरा रहे थे कि कहीं ऐसा न हो बच्चे छोटी उम्र में अमृत चख कर कल को नियम का पालन न कर सकें और पाप के भागीदार हों। दोनों बच्चों की इस गुरु के प्रति श्रद्धा व प्रेम को देखकर हर कोई दंग रह गया।
यह लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरनाम सिंह खालसा, सचिव रमिंदर सिंह सोनी, निर्माण सिंह, रविन्द्र सिंह बग्गा,परमजीत सिंह दुआ, कुलदीप सिंह आदि लोग शामिल रहे। सभी ने अमृत चखने वाले प्राणियों को गुरु वाला बनने पर बधाई दी।

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