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हाथों की मेहंदी भी नहीं छूटी, उजड़ गया सुहाग, शादी के चंद घंटों बाद विधवा हुई दुल्हन

संग्रामपुर गांव में जो खुशी के गीत गूंज रहे थे, वे पलभर में मातम में बदल गए। शादी के चंद घंटों बाद ही दुल्हन स्वाति का सुहाग उजड़ गया। जिस दूल्हे के साथ उसने सात फेरे लिए थे, उसकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई। हाथों की मेहंदी भी फीकी नहीं पड़ी थी कि वह विधवा हो गई।

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बरेली। संग्रामपुर गांव में जो खुशी के गीत गूंज रहे थे, वे पलभर में मातम में बदल गए। शादी के चंद घंटों बाद ही दुल्हन स्वाति का सुहाग उजड़ गया। जिस दूल्हे के साथ उसने सात फेरे लिए थे, उसकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई। हाथों की मेहंदी भी फीकी नहीं पड़ी थी कि वह विधवा हो गई।

धूमधाम से हुई थी शादी, लौटते ही छा गया मातम

दुनका क्षेत्र के गांव संग्रामपुर निवासी प्यारे लाल ने अपनी दामाद की बेटी स्वाति की शादी पूरे हर्षोल्लास के साथ रिठौरा निवासी सतीश यादव के साथ करवाई थी। शादी 6 फरवरी को धूमधाम से संपन्न हुई। बैंड-बाजों की गूंज, बारातियों का स्वागत, जयमाला और फेरे – सबकुछ एक सपने जैसा लग रहा था। शाम को बारात वापस रिठौरा लौट गई।
दुल्हन के मामा बबलू ने बताया कि शादी के बाद सबकुछ सामान्य था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। रात 10 बजे दूल्हा सतीश यादव अपने दोस्त और रिश्तेदारों – विजनेश यादव, सचिन यादव, पुष्पेंद्र यादव और रोहित के साथ बरेली पार्टी के लिए निकल गया। उनके साथ गाड़ी चला रहा अभिषेक भी था।

हादसे में दूल्हा और ड्राइवर दोनों की हो चुकी मौत

बरेली से लौटते समय, पीलीभीत बाईपास स्थित विलयधाम के पास उनकी बोलेरो गाड़ी एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी में बैठे सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को अस्पताल भेजा। इस दुर्घटना में बोलेरो चालक अभिषेक की मौके पर ही मौत हो गई। दूल्हा सतीश यादव गंभीर रूप से घायल था और डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शुक्रवार की रात उसने दम तोड़ दिया।

तीन परिवारों में छाया मातम, रुदन और कोलाहल

दूल्हे की मौत की खबर मिलते ही रिठौरा में उसके घर, संग्रामपुर में दुल्हन के ननिहाल और आगापुर में दुल्हन के मायके में कोहराम मच गया। शादी की मिठाइयों की जगह अब आंसू थे, बधाइयों की जगह मातम था। शव घर पहुंचते ही स्वाति और उसकी मां सर्वेश का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जो कुछ घंटे पहले हाथों में चूड़ा पहनकर नए सपने देख रही थी, वह अब सफेद साड़ी में लिपट गई।

परिवार पर टूटा ग़म का पहाड़

सतीश तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी, जबकि छोटा भाई अभिषेक अपने भाई की मौत से टूट चुका है। घरवालों को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि जिस बेटे को उन्होंने घोड़ी पर बैठाकर भेजा था, वह अब तिरंगे में लिपटकर वापस आया है। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंप दिया। लेकिन यह कागजी प्रक्रिया उस दर्द को कम नहीं कर सकती जो तीन परिवारों पर टूटा है। जिस आंगन में शादी के गीत गूंज रहे थे, वहां अब सिर्फ चीत्कार ही बची है।

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