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किसानों की बढ़ेगी आमदनी, पराली से तैयार होगा बायो कोल, बरेली में लगेगी फैक्ट्री

डीएम ने जीएम डीआईसी को झांसी में अपने समकक्ष अधिकारी से बात कर फैक्ट्री लगवाने के दिए निर्देश   बरेली में डेढ़ लाख हेक्टेयर में होती है धान की फसल धान के फसल अपशिष्ट प्रबंधन से नहीं बढ़ेगा प्रदूषण बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीएम बरेली रविंद्र कुमार ने धान की पराली से किसानों की आमदनी बढ़ाने और प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में सार्थक पहल शुरू कर दी है। बरेली में धान की पराली से अब बायो कोल तैयार किया जाएगा। इसके लिए फैक्ट्री लगाई जाएगी।

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डीएम ने जीएम डीआईसी को निर्देश दिए हैं कि वह झांसी में अपने समकक्ष से बात कर बरेली में फैक्ट्री लगवाएं। बरेली में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है। पराली जलाने से काफी प्रदूषण होता है। फसल अपशिष्ट प्रबंधन से एक तरफ किसानों की आमदनी बढ़ेगी दूसरा बरेली और आसपास का क्षेत्र प्रदूषण मुक्त होगा।


डीएम की किसानों से अपील, फसल अपशिष्ट ना जलाएं, खेत में ही करें प्रबंधन


डीएम रविंद्र कुमार ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए फैक्ट्री लगाने की तैयारी की जा रही है। तब तक सभी किसानों से अपील है कि फसल अपशिष्ट पराली को ना जलाएं। खेत में ही इसका उपयोग करें। इसको खेत में सड़ाने से खाद का काम करती है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। पराली नजदीकी गौशालाओं को दान करें। फसल अवशेष जलाना मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक है। पराली जलाए जाने से निकलने वाली गैसों के कारण आंखों में जलन और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां हो जाती हैं।

एक सप्ताह में निवेशकों की समस्याओं का होगा समाधान

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट यूपी को उद्योगों का प्रदेश बनाने की दिशा में डीएम ने तैयारी तेज कर दी है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए निवेशकों और विभागीय अफसर के साथ बैठक की। डीएम ने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी निवेशकों से बातचीत करें। निवेशकों को किस विभाग में और किस स्तर पर समस्या आ रही है। जिसका समाधान नहीं हो सका है। समस्या को चिन्हित करें। एक सप्ताह के अंदर सभी निवेशक और संबंधित विभाग के अधिकारियों से वार्ता करें। इसके बाद विभागीय अधिकारियों और निवेशकों के साथ बैठक होगी। निवेशकों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में अधिक से अधिक निवेशक अपना योगदान करेंगे। हर विभागीय स्तर पर उनका सहयोग किया जाएगा। निवेशकों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने दी जाएगी। उनकी समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा।