
बरेली। दहेज के लिए प्रताड़ना और गर्भवती पत्नी की मौत के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-1 कुमारी अफशां ने सुभाषनगर थाना क्षेत्र के मुनीमजी वाली गली, मढ़ीनाथ निवासी गोविंद सिंह को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण कोर्ट ने आरोपी के पिता जसवीर और मां द्रोपदी देवी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
सुभाषनगर थाना क्षेत्र की कैलाश कॉलोनी निवासी वीरपाल ने 14 अगस्त 2020 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी पूनम यादव की शादी 20 अप्रैल 2019 को गोविंद सिंह से हुई थी। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही पति गोविंद, ससुर जसवीर और सास द्रोपदी देवी दहेज की मांग को लेकर पूनम को प्रताड़ित करने लगे थे। पूनम कई बार मायके वालों को फोन कर अपने साथ हो रही प्रताड़ना की जानकारी देती थी, लेकिन समझौते और रिश्ते बचाने की कोशिश में मामला दबा रहा।
शादी के करीब एक साल चार महीने बाद पूनम नौ माह की गर्भवती थी। 14 अगस्त 2020 को गोविंद के दोस्त रिंकू ने पूनम के पिता वीरपाल को फोन कर बताया कि पूनम ने आत्महत्या कर ली है। यह खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। जब परिजन सुभाषनगर स्थित ससुराल पहुंचे तो पूनम का शव घर के बरामदे में रखा मिला। परिजनों ने इसे आत्महत्या नहीं बल्कि दहेज के लिए हत्या बताया और पति व सास-ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल नौ गवाह पेश किए, जिनमें मृतका के परिजन और जांच से जुड़े लोग शामिल थे। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पूनम लगातार दहेज के दबाव में थी और इसी प्रताड़ना के बीच उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. आशू अग्रवाल की गवाही इस मुकदमे में अहम साबित हुई। उन्होंने अदालत को बताया कि पूनम के पेट में लगभग 2900 ग्राम का शिशु था। यानी मौत के समय वह नौ माह की गर्भवती थी। इस तथ्य ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया और अदालत ने इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद अदालत ने पति गोविंद सिंह को दहेज हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने उसके पिता जसवीर और मां द्रोपदी देवी को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद मृतका के परिवार ने राहत की सांस ली और कहा कि उनकी बेटी के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आखिरकार अदालत ने न्याय किया।
Updated on:
07 Mar 2026 06:59 pm
Published on:
07 Mar 2026 06:58 pm
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