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800 रुपये में महीने भर सैकड़ों बार लगाइये बरेली का चक्कर, मार्च से डिजिटल एम-पास की एंट्री

शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम अब डिजिटल रफ्तार पकड़ने जा रहा है। मार्च 2026 से बरेली सिटी बसों में ऑनलाइन एम-पास (मंथली पास) सुविधा शुरू होने जा रही है। सीधे शब्दों में कहें तो अब मात्र 800-900 रुपये में महीने भर शहर के सैकड़ों चक्कर लगा सकते हैं, वो भी बिना काउंटर की लाइन लगाये।

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सिटी बस की प्रबंध संचालक मनीषा दीक्षित

बरेली। शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम अब डिजिटल रफ्तार पकड़ने जा रहा है। मार्च 2026 से बरेली सिटी बसों में ऑनलाइन एम-पास (मंथली पास) सुविधा शुरू होने जा रही है। सीधे शब्दों में कहें तो अब मात्र 800-900 रुपये में महीने भर शहर के सैकड़ों चक्कर लगा सकते हैं, वो भी बिना काउंटर की लाइन लगाये। प्रतिदिन करीब 5000 से 6000 यात्रियों की आवाजाही के बीच प्रशासन ने पास सिस्टम को मोबाइल ऐप से जोड़ने का फैसला लिया है।

सिटी बस की प्रबंध संचालक मनीषा दीक्षित ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन से अनुमोदन मिलने के बाद मार्च से एम-पास सेवा शुरू करवा दी जायेगी। गर्मी बढ़ने के साथ यात्रियों की संख्या में संभावित बढ़ोत्तरी होगी। डिजिटल सिस्टम से लोगों को सफर करने में आसानी होगी। रोजाना बस पकड़ने वाले छात्र, कर्मचारी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह बड़ा राहत पैकेज है। अभी तक पास बनवाने के लिए दफ्तरों और काउंटरों पर जाना पड़ता था। मार्च से यह झंझट खत्म होगा। यात्री मोबाइल ऐप के जरिए आवेदन करेंगे और डिजिटल पास सीधे फोन पर मिलेगा। बरेली में अभी 25 ई बसें चल रहीं हैं। सुबह 6.40 से लेकर रात में 9.40 तक बरेली शहर में ई बसों की सेवा उपलब्ध है। बरेली में वर्तमान में सभी पापुलर रूट, चौराहे और स्टेशन ई बसों द्वारा कवर किये जा रहे हैं।

नई व्यवस्था के तहत जारी होंगे ये पास:

सामान्य 30 दिन का पास - 900
छात्र 30 दिन का पास - 800
वरिष्ठ नागरिक 30 दिन का पास - 800
एक दिन का विशेष पास - 80 (अधिकतम 10 यात्राएं)

मोबाइल ऐप से आवेदन, KYC के बाद मिलेगा डिजिटल पास

“E-City Bus UP Online” ऐप के माध्यम से पूरी प्रक्रिया होगी। केवाईसी (KYC) अनिवार्य रहेगा। सत्यापन होते ही पास मोबाइल पर जारी होगा। बस में चढ़ते समय कंडक्टर ETIM मशीन से QR कोड स्कैन कर पास सत्यापित करेगा। अब टिकट की जांच तेज और पारदर्शी तरीके से की जायेगी। डिजिटल एम-पास लागू होने से कैश लेनदेन घटेगा और राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। फर्जी पास और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे समय बचेगा, झंझट कम होगा और सफर का अनुभव बेहतर होगा।