
विलियम दिलावर
बरेली। सिविल लाइंस जैसे पाश इलाके में करीब एक हजार करोड़ रुपये की बेशकीमती नजूल (सरकारी) जमीन को अवैध तरीके से बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में बरेली के मिशन कंपाउंड निवासी पांच लोगों को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब तलब किया गया है। आरोपी प्रापर्टी माफियाओं के खिलाफ एफआईआर की तैयारी है।
मुरादाबाद में पीलीकोठी से बिंदल तक गाटा संख्या 424 ए व 424 ब की करीब साढ़े 11 एकड़ नजूल भूमि वर्ष 1917 में एमए मिशन मैथोडिस्ट चर्च को पट्टे पर दी गई थी। शर्त साफ थी कि 90 वर्ष पूरे होने पर भूमि स्वतः नजूल में दर्ज हो जायेगी। हर 30 साल में नवीनीकरण अनिवार्य होगा। बिना जिलाधिकारी की अनुमति तय शर्तों के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हो सकती थी और नया निर्माण भी प्रतिबंधित था।
मैथोडिस्ट चर्च के पदाधिकारियों ने पट्टे की शर्तों का उल्लंघन करते हुए जमीन बरेली की फर्म विलियम कंस्ट्रक्शन को डीड कर दी। इतना ही नहीं, डीड में पट्टे के हस्तांतरण की बात कहते हुए बेचने तक के अधिकार दे दिये गए, जबकि राजस्व नियमों के अनुसार पट्टे का पट्टा नहीं होता। शासन की अनुमति के बिना किसी भी पट्टे का हस्तांतरण संभव नहीं है। धोखेबाजों ने शासन तो दूर, जिला स्तर पर भी कोई विधिक अनुमति नहीं ली।
विलियम कंस्ट्रक्शन ने वर्ष 2013 में पूरी करीब साढ़े 11 एकड़ भूमि की अवैध प्लाटिंग कर डाली। देखते-देखते सरकारी जमीन पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स से लेकर आलीशान कोठियां तक खड़ी हो गईं। एडीएम की रिपोर्ट में इस पूरे खेल से लगभग एक हजार करोड़ रुपये की सरकारी क्षति का आंकलन किया गया है।
डीएम मुरादाबाद अनुज सिंह को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद विस्तृत जांच के निर्देश दिये गये। शनिवार को एडीएम ममता मालवीय की ओर से विलियम कंस्ट्रक्शन के विलियम दिलावर, मनोहर लाल, विकास गुप्ता, पाल सारस्वत एवं लक्ष्मी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी कर दिये गये। सभी बरेली में मिशन कंपाउंड और कैंट क्षेत्र के रहने वाले हैं। पांचों को 15 दिन के भीतर पेश होकर जवाब देना होगा। माना जा रहा है कि बयान दर्ज होते ही इस खेल से जुड़े कई और चेहरे बेनकाब होंगे।
राजस्व नियम स्पष्ट कहते हैं कि पट्टे का हस्तांतरण केवल शासन की अनुमति से ही संभव है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर अवैध डीड और प्लाटिंग बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं मानी जा रही। जांच आगे बढ़ने के साथ तत्कालीन अफसरों की भूमिका भी कठघरे में आ सकती है। डीएम ने बताया कि रिपोर्ट में एक हजार करोड़ की क्षति का आंकलन किया गया है। संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नजूल की भूमि को पुनः उसी श्रेणी में दर्ज कराकर सरकारी कब्जे में लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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Published on:
01 Mar 2026 08:59 pm
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