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फर्जी बीमा क्लेम करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, एसटीएफ ने 8 आरोपी दबोचे

एसटीएफ उत्तर प्रदेश ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी बीमा क्लेम करने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने गुरुवार को नैनीताल-बरेली हाईवे पर छापेमारी कर इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपी वृद्धों की फर्जी उम्र दर्शाकर बीमा कराते थे और मृत्यु के बाद बीमा कंपनी से लाखों का क्लेम वसूलते थे।

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एसटीएफ ने 8 आरोपी किये गिरफ्तार

बरेली। एसटीएफ उत्तर प्रदेश ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी बीमा क्लेम करने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने गुरुवार को नैनीताल-बरेली हाईवे पर छापेमारी कर इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपी वृद्धों की फर्जी उम्र दर्शाकर बीमा कराते थे और मृत्यु के बाद बीमा कंपनी से लाखों का क्लेम वसूलते थे।

इन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

  1. राहुल गिहार निवासी कंचनपुर, थाना भोजीपुरा
  2. जगदीश निवासी पीपलसाना चौधरी, भोजीपुरा
  3. सुरेन्द्र गंगवार निवासी मोर्डन विलेज कॉलोनी, भोजीपुरा
  4. बन्टी निवासी पीपलसाना चौधरी
  5. नरेन्द्र उर्फ नन्दू निवासी पीपलसाना चौधरी
  6. संदीप निवासी अशोक नगर मढीनाथ, सुभाष नगर
  7. बासिद निवासी दियोरिया, भोजीपुरा
  8. प्रभाकर त्रिपाठी निवासी एयरोसिटी करमपुर चौधरी

बरामदगी में मिला फर्जीवाड़े का बड़ा जखीरा

एसटीएफ ने मौके से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें 14 क्लेम फार्म, 23 आधार कार्ड, 33 बैंक पासबुक, 6 पैन कार्ड, 66 ग्राम प्रधान/आंगनबाड़ी/आशाओं से हस्ताक्षरित निवास प्रमाण पत्र, 85 डाक टिकट, 12 मोबाइल फोन, ₹3,300 नकद और अन्य दस्तावेज शामिल हैं।

ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' के तहत केवल 18 से 50 वर्ष की उम्र वालों का बीमा दिखाते थे, जबकि असल में वे 80-85 साल के बुजुर्गों का फर्जी आधार कार्ड बनाकर बीमा कराते थे। मृत्यु के बाद फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों के जरिए क्लेम वसूलते थे।

एलआईसी ने रोक दिया था भुगतान

जांच में पाया गया कि कई बीमा पॉलिसियां मृत व्यक्ति के मृत्यु से कुछ दिन पहले ही कराई गई थीं। इस पर एलआईसी ने शक जताते हुए भुगतान रोक दिया और जांच शुरू कर दी थी।

संदीप, योगेश और प्रभाकर 'सर्वेयर' बन कर लेते थे पैसे

संदीप, योगेश और प्रभाकर त्रिपाठी हर बीमा क्लेम पर ₹
30 हजार तक लेते थे। प्रभाकर अपनी असली पहचान छिपाने के लिए खुद को 'अनिल' बताता था। भोजीपुरा थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।