23 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दादा का एनकाउंटर, फिर भी नहीं टूटी दबंगई, तीन पीढ़ियों से आतंक का पर्याय बना परिवार बदायूं हत्याकांड में खुली परतें

एचपीसीएल गैस प्लांट में दो अधिकारियों की हत्या के बाद अब आरोपी अजय प्रताप सिंह के परिवार का काला इतिहास सामने आने लगा है।

2 min read
Google source verification

सुधीर गुप्ता, हर्षित मिश्रा

बदायूं। एचपीसीएल गैस प्लांट में दो अधिकारियों की हत्या के बाद अब आरोपी अजय प्रताप सिंह के परिवार का काला इतिहास सामने आने लगा है। गांव सैजनी में दहशत का दूसरा नाम बन चुके इस परिवार की कहानी तीन पीढ़ियों तक फैली दबंगई, अपराध और राजनीतिक संरक्षण की परतें खोल रही है। सबसे चौंकाने वाली बात है कि जिस परिवार के दादा का कभी पुलिस एनकाउंटर हुआ, उसी राह पर अगली पीढ़ियां और ज्यादा खतरनाक होती चली गईं।

‘एनकाउंटर की विरासत’… अपराध की राह पर बढ़ती गई पीढ़ियां

ग्रामीणों के मुताबिक आरोपी अजय के दादा श्याम बहादुर का नाम भी गंभीर अपराधों में था और एक मामले में पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हुई थी। लेकिन इस एनकाउंटर के बाद भी परिवार की दबंगई खत्म नहीं हुई, बल्कि ताऊ और तहेरे भाइयों ने उसी रास्ते को आगे बढ़ाया। समय के साथ यह परिवार इलाके में खौफ का पर्याय बन गया।

सैजनी में ‘अघोषित साम्राज्य’, करोड़ों की संपत्ति का खेल

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परिवार ने वर्षों में ग्राम समाज की जमीन, मकान और दुकानों पर कब्जा कर करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली। हालात यह रहे कि कई परिवार डर के कारण गांव छोड़ने को मजबूर हो गए। सैजनी और आसपास के इलाकों में इस परिवार का एक तरह से ‘अघोषित राज’ चलता रहा।

राजनीति का साया, सफेदपोशों से रिश्तों ने बढ़ाया रसूख

जानकारों के अनुसार इस परिवार की पहुंच केवल अपराध तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय के साथ राजनीतिक पकड़ भी मजबूत होती गई। अलग-अलग दलों के नेताओं से नजदीकी और फोटो वायरल होने के बाद चर्चाएं तेज हैं कि इसी संरक्षण के चलते लंबे समय तक सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें, उठ रहे बड़े सवाल

अजय प्रताप सिंह और उसके परिजनों की कई राजनीतिक चेहरों के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों ने प्रशासन और राजनीतिक गठजोड़ को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं—क्या यही संरक्षण इस ‘दबंग नेटवर्क’ की ताकत बना।

ताऊ और तहेरे भाई पर भी आरोपों की लंबी फेहरिस्त

परिवार के अन्य सदस्यों का रिकॉर्ड भी विवादों से भरा है। ताऊ राकेश सिंह पर कई एफआईआर दर्ज हैं, जबकि तहेरे भाई अभय प्रताप सिंह का नाम 2023 में इंजीनियरों के कथित अपहरण और मारपीट जैसे मामलों में सामने आ चुका है। भाई केशव भी इलाके में आक्रामक व्यवहार और दबंगई के लिए कुख्यात बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सालों से इस परिवार का ऐसा खौफ रहा कि कोई खुलकर विरोध नहीं कर पाया। अब हत्याकांड के बाद लोग धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं, लेकिन डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पुलिस का शिकंजा कसना शुरू, NSA और लाइसेंस निरस्तीकरण की तैयारी

पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। परिवार के शस्त्र लाइसेंसों की जांच शुरू हो गई है और निरस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही दोहरे हत्याकांड के आरोपियों पर NSA लगाने की तैयारी भी तेज कर दी गई है। दादा के एनकाउंटर के बाद भी अगर अपराध की जड़ें और मजबूत होती गईं, तो आखिर जिम्मेदार कौन? बदायूं का यह कांड अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पूरे ‘दबंग तंत्र’ की पड़ताल बन गया है।