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आईवीआरआई ने रच दिया इतिहास… बरेली की लैब में ‘टेस्ट ट्यूब’ से एक साथ जन्मे 5 बछड़े

देसी नस्ल सुधार की दौड़ में बरेली ने बड़ा दांव खेल दिया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने टेस्ट ट्यूब तकनीक से एक साथ चार बछड़े और एक बछिया का जन्म कराकर पशुपालन क्षेत्र में नई लकीर खींच दी है। सात महीने की मेहनत के बाद मिली इस कामयाबी ने वैज्ञानिकों का कद और बढ़ा दिया है।
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बरेली। देसी नस्ल सुधार की दौड़ में बरेली ने बड़ा दांव खेल दिया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने टेस्ट ट्यूब तकनीक से एक साथ चार बछड़े और एक बछिया का जन्म कराकर पशुपालन क्षेत्र में नई लकीर खींच दी है। सात महीने की मेहनत के बाद मिली इस कामयाबी ने वैज्ञानिकों का कद और बढ़ा दिया है।

यह पूरा कारनामा ओवम पिकअप (ओपीयू) और इन विट्रो फर्टीलाइजेशन तकनीक से हुआ। अल्ट्रासाउंड के जरिए अंडाणु निकाले गए, लैब में भ्रूण तैयार किया गया और फिर उसे दूसरी गाय-भैंस में प्रत्यारोपित किया गया। नतीजा—एक नहीं, पांच-पांच स्वस्थ जन्म।

बृजेश कुमार की टीम ने कर दिखाया कमाल

डॉ. बृजेश कुमार की अगुवाई में वैज्ञानिकों की टीम ने इस प्रोजेक्ट को अंजाम दिया। इसमें डॉ. विक्रांत सिंह चौहान, डॉ. विकास चंद्र, डॉ. एमके पात्रा समेत कई विशेषज्ञ शामिल रहे। संस्थान के बड़े अधिकारियों ने भी इस उपलब्धि को बड़ी सफलता बताया है। पहला बछड़ा 28 फरवरी को साहीवाल गाय ‘गौरी’ से जन्मा। इसके बाद मार्च में लगातार चार और जन्म हुए। हर जन्म के साथ वैज्ञानिकों का भरोसा और मजबूत होता गया।

देसी नस्ल का दम, दूध उत्पादन पर नजर

वैज्ञानिकों ने हाई क्वालिटी जर्मप्लाज्म चुना। दाता गाय रोज 12 लीटर से ज्यादा दूध देती थी, जबकि इस्तेमाल किए गए सांड की नस्ल भी उच्च उत्पादन वाली रही। साफ है—टारगेट है ज्यादा दूध, बेहतर नस्ल और किसानों की कमाई। जहां सामान्य तरीके से एक साल में एक ही बछड़ा मिलता है, वहीं इस तकनीक से एक गाय से 20 और भैंस से करीब 10 उन्नत नस्ल के पशु पैदा किए जा सकते हैं। यानी एक झटके में पशुधन उत्पादन कई गुना बढ़ाने की तैयारी।

किसानों के लिए सीधा फायदा, जेब होगी भारी

अब किसान अपनी अच्छी नस्ल के पशु का भ्रूण लैब में तैयार करवा सकेंगे और उसे दूसरी गाय-भैंस में डलवा सकेंगे। इससे बेहतर नस्ल तेजी से बढ़ेगी और दूध उत्पादन में बड़ा उछाल आएगा। आईवीआरआई पहले भी एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक से 30 बछड़ों का जन्म करा चुका है। लेकिन नई तकनीक ज्यादा असरदार और किफायती साबित हो रही है। साफ है—बरेली अब देसी नस्ल सुधार की लैब बनता जा रहा है।