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हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बना जोगीनवादा, हरिद्वार गंगाजल लेने गए कांवड़ियों पर मुस्लिम समुदाय ने बरसाए फूल, पहनाई मालाएं

सांप्रदायिक तनाव का पर्याय बन चुका बरेली का जोगीनवादा इस बार सावन के पहले शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बन गया। जहां पिछले दो सालों में कांवड़ यात्रा के दौरान तनाव और टकराव की घटनाएं सामने आई थीं, वहीं इस बार माहौल पूरी तरह बदला नजर आया।

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बरेली। सांप्रदायिक तनाव का पर्याय बन चुका बरेली का जोगीनवादा इस बार सावन के पहले शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बन गया। जहां पिछले दो सालों में कांवड़ यात्रा के दौरान तनाव और टकराव की घटनाएं सामने आई थीं, वहीं इस बार माहौल पूरी तरह बदला नजर आया।

बारादरी के जोगी नवादा से शुक्रवार जुमे की नमाज के बाद हरिद्वार गंगाजल लेने रवाना हुए शिवभक्तों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फूल बरसाए, मालाएं पहनाई गईं और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ कांवड़ियों को आगे रवाना किया गया। इस दौरान भारी पुलिस फोर्स मुस्तैद रहा है।

ताजिया जुलूस में हिंदू समुदाय ने बरसाए थे फूल

पिछले सालों में इसी इलाके में कांवड़ मार्ग को लेकर विवाद, पथराव और तनाव की घटनाएं हुई थीं। लेकिन इस बार प्रशासन और स्थानीय लोगों की सजगता से हालात न सिर्फ शांत रहे, बल्कि आपसी सौहार्द के रंगों से सराबोर हो उठे। हाल ही में मुहर्रम के दौरान हिंदू समुदाय के लोगों ने ताजिया जुलूस में शामिल मुस्लिम भाइयों का स्वागत कर दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। उसी सौहार्द की बुनियाद पर अब सावन में मुस्लिम समुदाय ने शिवभक्तों को गले लगाया।

सीओ, पुलिस फोर्स और पीएसी रही मुस्तैद

जिला प्रशासन की सतर्कता और पुलिस की सूझबूझ से यह बदलाव संभव हो सका। मुहर्रम से पहले ही जोगीनवादा में लगातार पीस कमेटी की बैठकें की गईं, जिनमें दोनों समुदायों के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। पुराने गिले-शिकवे दूर हुए और तय किया गया कि इस बार नफरत नहीं, सिर्फ मोहब्बत दिखेगी। कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव, बारादरी इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय और पुलिस फोर्स व पीएसी बल पूरे काफिले के साथ मौजूद रहे।

हरिद्वार के लिए रवाना हुआ कांवड़ियों का पहला जत्था

स्थानीय निवासी मोहम्मद आरिफ ने कहा त्योहार आपसी मोहब्बत और मिल-जुल कर रहने का नाम है। आज जो हुआ, वह नई पीढ़ी के लिए मिसाल बनेगा। उधर हरिद्वार के लिए रवाना हुए कांवड़ियों ने भी मुस्लिम समाज के इस भावनात्मक स्वागत को यादगार बताया।उन्होंने कहा, हमने उम्मीद नहीं की थी कि जोगीनवादा में ऐसा स्वागत मिलेगा। ऐसा लगा मानो पूरा इलाका हमारे साथ चल रहा हो।

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