
सीईओ डॉ. तनु जैन
बरेली। स्वच्छ हवा, हरियाली और शांत माहौल के लिए पहचाने जाने वाले छावनी क्षेत्र को अब पूरी तरह “ग्रीन ज़ोन” बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यहां कचरे से बिजली और बायो-सीएनजी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू होने जा रहा है।
छावनी परिषद ने इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस प्लांट में प्रतिदिन 40 टन से अधिक गीला और सूखा कचरा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया जाएगा। इससे न केवल कचरे की समस्या कम होगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
परियोजना के तहत कचरे से ग्रीन एनर्जी तैयार की जाएगी। सूखे और ठोस अपशिष्ट से बिजली उत्पादन के साथ-साथ बायो-सीएनजी भी बनाई जाएगी। इससे छावनी क्षेत्र ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। सीईओ डॉ. तनु जैन के मुताबिक, इस परियोजना के लागू होने के बाद स्थानीय निवासियों को पाइपलाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध कराने की योजना है। इससे घरेलू उपयोग में सुविधा बढ़ेगी और एलपीजी पर निर्भरता कम होगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सीएसआर फंड के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इसके संचालन के लिए देशभर की ग्रीन एनर्जी कंपनियों से बातचीत चल रही है, ताकि अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा सके। वहीं छावनी क्षेत्र में सीवर और नालों के पानी को शुद्ध करने के लिए छह एमएलडी क्षमता का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जाएगा। इससे न केवल छावनी क्षेत्र का पानी साफ होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषित पानी को भी शोधित किया जा सकेगा।
छावनी परिषद क्षेत्र को स्मार्ट, ग्रीन और नागरिकों के लिए बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हरियाली बढ़ाने, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसी योजनाओं पर विशेष फोकस है। इसी दिशा में यह इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट एक बड़ा कदम साबित होगा। सीईओ डॉ. तनु जैन ने बताया कि इस परियोजना से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और छावनी क्षेत्र को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।
Published on:
31 Mar 2026 04:57 pm
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