
बरेली के विधायकों का एक दिलचस्प किस्सा, जानिए क्यों मंत्री नहीं रह पाते बरेली के नेता
बरेली। योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार Cabinet expansion से बरेली के दोनों मंत्रियों वित्त मंत्री Finance Minister राजेश अग्रवाल Rajesh Agrwal और सिंचाई मंत्री Irrigation minister धर्मपाल सिंह Dharampal singh को इस्तीफा देना पड़ा। ये पहली बार नहीं है कि बरेली के विधायकों को बीच में ही इस्तीफा देना पड़ा हो बल्कि ये सच है कि बरेली के ज्यादातर विधायक उत्तर प्रदेश सरकार Uttar Pradesh Government के मंत्री Minister के रूप में अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए । सरकार किसी की भी हो , कारण कोई भी बना हो पर बरेली के विधायकों को मंत्री पद बीच में छोड़ना पड़ गया । हाल ही में योगी सरकार के वित्त मंत्र राजेश अग्रवाल व सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के मंत्रीमंडल से इस्तीफे के बाद इस बावत चर्चा शुरू हो गई है ।
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बात शुरू करें धर्मदत्त वैद्य से तो वह स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये थे । इसके बाद 1977 में बनी सरकार में नगर विकास राज्य मंत्री बनाये गए सत्य प्रकाश अग्रवाल भी अपना कार्यकाल नहीं पूरा कर पाए। सत्यप्रकाश अग्रवाल ने राज्य मंत्री के रूप में शहर के विकास के लिए उस समय काफी प्रयास किया । उस समय के लोग बताते हैं कि सत्यप्रकाश ने शहर के विकास की बेहतर रूपरेखा तैयार की थी । वह कई प्रोजेक्ट पर काम कर ही रहे थे कि अचानक केन्द्र सरकार गिर गई । भाजपा के अन्य विधायकों के साथ सत्यप्रकाश अग्रवाल ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया । मतलब ये कि वह राज्य मंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये । इनके बाद अपने समय के दिग्गज काँग्रेसी नेता जगदीश शरण अग्रवाल को हरा कर विधायक बने राम सिंह खन्ना को भी प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का पद मिला था । बाबा अलखनाथ मंदिर का सौन्दयीकरण उनके कार्यकाल में ही हो पाया था । इसके अलावा भी विकास के अनेक कार्य कराये गए थे । दुर्भाग्य से राम सिंह खन्ना भी राज्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाये।
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इसके बाद हुए उप चुनाव में भाजपा के डॉ दिनेश जौहरी ने विजय हासिल की । तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने डॉ जौहरी को अपनी कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में स्थान दिया । डॉ . जौहरी के स्वास्थ्य मंत्री रहते ही प्रदेश में डॉक्टरों की बड़ी हड़ताल हुई थी । लगभग 27 दिन चली डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह लड़खड़ा गई थीं । इसके अलावा भी डॉ ० जौहरी से कई अन्य विवाद भी जुड़ गए । नतीजा ये हुआ की डॉ . जौहरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने यूपी मंत्री मंडल से बर्खास्त कर दिया । इसके बाद मंत्रीमंडल विस्तार में बरेली से विधायक बहोरन लाल मौर्य को राजस्व राज्य मंत्री एवं धर्मपाल सिंह को पंचायत राज एवं लोक निर्माण विभाग का मंत्री बनाया गया था । इनका कार्यकाल भी पूर्ण नहीं हो पाया ।
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इसी तरह अखिलेश सरकार में लघु उद्योग राज्य मंत्री बनाये गए नवाबगंज के विधायक भगवत सरन गंगवार को भी मंत्री मंडल से त्यागपत्र देना पड़ गया था।हालिया मामला योगी सरकार में वित्तमंत्री रहे राजेश अग्रवाल एवं सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के इस्तीफे का है । भाजपा के दन दोनों विधायकों को भी कार्यकाल के बीच में ही अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा ।
Published on:
23 Aug 2019 08:58 am
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