यहाँ होती हैं अनोखी रामलीला, जानिए क्या हैं खासियत

यहाँ होती हैं अनोखी रामलीला, जानिए क्या हैं खासियत

suchita mishra | Publish: Oct, 14 2018 12:30:22 PM (IST) | Updated: Oct, 14 2018 12:30:23 PM (IST) Bareilly, Uttar Pradesh, India

रामलीला में अभिनय के लिए नौकरी के लिए जिले के बाहर रहने वाले लोग एक माह की छुट्टी लेकर बरेली आते है।

बरेली। आम तौर पर रामलीला में अभिनय करने के लिए मंडलियों को बुलाया जाता है। लेकिन बरेली में एक ऐसी रामलीला होती है जिसमे अभिनय के लिए बाहर से मण्डली को नहीं बुलाया जाता है बल्कि इलाके के रहने वाले लोग ही रामलीला के पात्रों को जीवंत करते हैं। रामलीला में अभिनय के लिए नौकरी के लिए जिले के बाहर रहने वाले लोग एक माह की छुट्टी लेकर बरेली आते है। 77 साल से लगातार जारी इस रामलीला में अभिनय करने वाला कोई रेलवे में नौकरी करता है तो कोई कॉलेज में शिक्षक है तो कोई छात्र है या फिर कोई अपना व्यवसाय करता है।बरेली के गौरव माने जाने पंडित राधेश्याम कथावाचक की रामायण पर आधारित सुभाषनगर की ये रामलीला आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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शिक्षक बनते हैं राम

पिछले आठ साल से इस रामलीला में सीता का अभिनय करने वाले चिराग सक्सेना लखनऊ में एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते है। चिराग सक्सेना का कहना है कि वह बचपन से ही रामलीला देखते आ रहे हैं,उनके किसी साथी ने पहली बार रामलीला में अभिनय का प्रस्ताव रखा तो वह तैयार हो गये। कमेटी के लोगों ने महिला चरित्र निभाने की गुजारिश की तो उन्होंने सॉफ इंकार कर दिया। समझाने-बुझाने के बाद राजी हुये तो उन्हें सीता की सखी का अभिनय करने को कहा गया,उसके बाद कौशल्या का चरित्र जीवंत करने का भी अवसर मिला। पिछले आठ साल से माता सीता की भूमिका निभा रहे हैं। पेशे से शिक्षक अजय शर्मा पिछले 18 वर्षों से रामलीला में प्रभु श्रीराम की भूमिका निभा रहें है। बचपन से उन्होंने इस रामलीला को देख कर अभिनय सीखा और पहले उन्हें शत्रुघन का पात्र निभाने का मौका मिला उसके बाद से वो पिछले 18 सालों से प्रभु श्री राम का रोल अदा कर रहें है।

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शिक्षक और छात्र भी करते हैं अभिनय

18 साल से ही लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे सुभाषनगर निवासी रामकुमार तिवारी, गुरूनानक खालसा इंटर कालेज में शिक्षक हैं । अभिनय की शुरूआत उन्होंने भी शत्रुघन का पात्र निभाने से ही की थी।रामकुमार कहते है कि रामलीला के दौरान वह सुबह कालेज में पढ़ाने जाते हैं और रात को रामलीला में अभिनय करने को आते हैं। रामलीला देखने के लिए वो अपने कॉलेज के छात्रों को भी बुलाते है जिससे कि छात्रों को भी रामलीला के महत्त्व का पता चल सके। 11वीं के छात्र करमजीत सिंह जो रामलीला में शत्रुघ्न, अग्निदेव, समुन्द्र का अभिनय पिछले पांच साल से कर रहे हैं। रात में रामलीला का मंचन करते हैं ओर रोज सुबह स्कूल जाते हैं,लेकिन पढ़ाई में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है।

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77 साल पुुरानी सुभाषनगर की रामलीला


सुभाषनगर की रामलीला का इतिहास 77 साल पुराना है,इसके संस्थापक बाला प्रसाद शुक्ला और हजारी लाल थे। कमेटी के मंत्री आलोक तायल एडवोकेट ने बताया कि 1941 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने रामलीला मैदान आवंटित किया था। तब से ही हर साल दशहरे से पूर्व यहीं पर रामलीला का आयोजन किया जाता है। वर्तमान में कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा, मेला प्रभारी प्रदीप अग्रवाल उर्फ कल्लू,धर्मशाला प्रभारी राजेन्द्र सिंह तनेजा व सदस्य दिलीप कुमार श्रीवास्तव, अजस सक्सेना, जुगल किशोर सिंह हैं।

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